गुरूवार, 27 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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गुजरात: वढ़वाण की सदियों पुरानी बांधणी कला, जो 75% आबादी की रोजी-रोटी का आधार है

गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले में स्थित वढ़वाण तालुका की बांधणी कला सिर्फ एक खूबसूरत हस्तशिल्प नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के लिए आजीविका का मुख्य आधार बन चुकी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…

गुजरात: वढ़वाण की सदियों पुरानी बांधणी कला, जो 75% आबादी की रोजी-रोटी का आधार है
(फोटो: IANS)

गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले में स्थित वढ़वाण तालुका की बांधणी कला सिर्फ एक खूबसूरत हस्तशिल्प नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के लिए आजीविका का मुख्य आधार बन चुकी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस इलाके की लगभग 75 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसी कला से जुड़ी हुई है, जिसने सैकड़ों वर्षों की विरासत को आज भी जीवित रखा है।

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हाथ से की जाने वाली बारीक टाई-डाई तकनीक से तैयार होने वाली वढ़वाण की बांधणी अपनी मौलिकता और सुंदरता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। साड़ी, ड्रेस और दुपट्टे जैसे इसके उत्पाद स्थानीय पहचान बन चुके हैं। समय के साथ पारंपरिक डिजाइनों में नए प्रयोगों ने इसे बाजार में और भी लोकप्रिय बना दिया है, जिससे व्यापारी और ग्राहक दोनों संतुष्ट हैं।

महिला कारीगर और आत्मनिर्भरता

इस कला को सहेजने और आगे बढ़ाने में महिला कारीगरों का योगदान सबसे महत्वपूर्ण है। ज्यादातर घरों में महिलाएं घरेलू कामकाज के साथ-साथ बांधणी का काम करती हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार की आर्थिक मदद भी कर रही हैं।

एक महिला कारीगर श्रद्धा बेन बताती हैं, "मैं बांधणी का काम करके अपनी आजीविका चलाती हूं। घर के काम के साथ यह काम करके मैं 250 से 300 रुपए कमा लेती हूं। वढ़वाण में 80 प्रतिशत लोगों की रोजी-रोटी इसी से चलती है।"

व्यापार और बाजार

यहां तैयार माल देश के प्रमुख थोक बाजारों तक पहुंचता है और फिर वहां से दुनिया भर में निर्यात होता है। एक स्थानीय कारोबारी दीपकभाई खत्री के मुताबिक, "मेरी एक डाइंग फैक्ट्री है, और माल तैयार होने के बाद मैं उसे अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और बेंगलुरु के होलसेल मार्केट में पूरे भारत में सप्लाई करता हूं, और वहां से हमारी बांधणी इंडस्ट्री विदेश में भी फैल रही है।" ग्राहकों का भी मानना है कि वढ़वाण की बांधणी का ट्रेंड कभी पुराना नहीं होता और यह गर्मियों के लिए बेहद आरामदायक होती है।

सरकारी योजनाओं से मिला सहारा

गुजरात सरकार भी इस पारंपरिक कला को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। उप उद्योग आयुक्त एस.बी. परेजिया ने बताया कि राज्य सरकार की केबल स्कीम, डीटीवाई स्कीम और मानव कल्याण योजना जैसी योजनाओं का लाभ यहां के कारीगरों को मिल रहा है। इन प्रयासों से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, बल्कि यह महिला सशक्तीकरण का एक सशक्त माध्यम भी बन गया है।

इनपुट: IANS

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News4Social गुजरात डेस्क

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