महीसागर में साक्षरता की नई कहानी: रात की क्लास से 4,135 लोगों ने पाई शिक्षा, अब खुद करते हैं बैंक-डेयरी के काम
उम्र चाहे कितनी भी हो, सीखने की चाहत हो तो रास्ता निकल ही आता है — गुजरात के महीसागर जिले की वे ग्रामीण महिलाएं इसकी जीती-जागती मिसाल हैं, जो कभी सिर्फ अंगूठे से काम चलाती थीं और आज खुद दस्तखत करना सी
उम्र चाहे कितनी भी हो, सीखने की चाहत हो तो रास्ता निकल ही आता है — गुजरात के महीसागर जिले की वे ग्रामीण महिलाएं इसकी जीती-जागती मिसाल हैं, जो कभी सिर्फ अंगूठे से काम चलाती थीं और आज खुद दस्तखत करना सीख चुकी हैं। यह बदलाव लाया है भारत सरकार के 'उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम' ने, जिसे महीसागर जिला प्रशासन ने ज़मीनी स्तर पर बड़ी सफलता के साथ लागू किया है।
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान के पहले चरण में जिले के हज़ारों निरक्षर नागरिकों को न केवल पढ़ना-लिखना सिखाया गया, बल्कि बैंक, पोस्ट ऑफिस, डेयरी और रोज़गार से जुड़े रोज़मर्रा के कामकाज में भी उन्हें आत्मनिर्भर बनाया गया।
अंगूठे की जगह अब दस्तखत — महिलाओं ने सुनाई अपनी कहानी
कार्यक्रम में भाग लेने वाली मगूबेन ने बेहद सरल शब्दों में अपनी तब्दीली बयान की — "पहले मुझे अंगूठा लगाने आता था। आज साइन करना सीख लिया। टीचर आते हैं, जो कई प्रकार की शिक्षा देते हैं जिसके कारण हमने तीन बार परीक्षा पास किया। हम इतनी उम्र में साइन करना सीख गए हैं; इसके लिए हम बहुत खुश हैं।"
एक अन्य प्रतिभागी भारतीबेन का अनुभव भी कम प्रेरणादायक नहीं रहा। उन्होंने बताया — "मुझे घड़ी देखने और 100 तक गिनती सीखने में कठिनाई हो रही थी। बच्चों ने ये दोनों चीजें सिखाई हैं। अब मैं घड़ी देखना और एक से 100 तक गिनती बोलना सीख गई हूं। इसके साथ ही डेरी में दूध भरते समय दी जाने वाली पर्ची को देखना भी आ गया है।"
रात साढ़े सात बजे की क्लास — कैसे चला यह अभियान
महीसागर जिले में कुल 717 गांव हैं। वर्ष 2025 में सबसे पहले उन गांवों का सर्वेक्षण किया गया जहाँ महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से कम थी। इस सर्वे में 4,697 निरक्षर व्यक्तियों को चिन्हित किया गया। इन्हें 126 शिक्षकों की देखरेख में 532 विद्यार्थियों ने छह महीने तक पढ़ाया।
पाखी, पट्टन, लिबोदरा और राणपुर सहित जिले के कई गांवों में कक्षाएं रात 7:30 से 8:30 बजे के बीच लगाई गईं — ठीक उस वक्त जब घर-परिवार की ज़िम्मेदारियों से निपटकर महिलाएं थोड़ा फुर्सत पाती थीं। मार्च में हुई परीक्षा में 4,561 लोगों ने हिस्सा लिया और इनमें से 4,135 सफल रहे। उत्तीर्ण प्रतिभागियों को भारत सरकार की ओर से प्रमाण-पत्र दिया जाएगा।
कलेक्टर बोलीं — महिलाओं का उत्साह रहा सबसे बड़ी ताक़त
महीसागर की जिला कलेक्टर अर्पित सागर ने इस अभियान की सफलता का श्रेय महिलाओं की अपनी लगन को दिया। उन्होंने कहा — "बच्चों ने रात 7:30 से 8:30 बजे, जिस टाइम बहनें (पढ़ाई करने वाली महिलाएं) फ्री होती हैं, उस टाइम उनको पढ़ाया। बैंक में कैसे काम करना है, यह भी सिखाया। लिखना और पढ़ना सिखाया। सबसे अच्छी बात यह है कि महिलाओं ने काफी उत्साह से इस अभियान में हिस्सा लिया।"
दूसरा चरण: 15 जुलाई से, लक्ष्य है 100% साक्षरता
अब अभियान का दूसरा चरण शुरू होने वाला है। जिला कलेक्टर के अनुसार, इस बार उन गांवों का सर्वे किया जाएगा जहाँ महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से अधिक है। 15 जुलाई से 15 अक्टूबर तक कक्षाएं संचालित होंगी और मार्च तक परीक्षा के लिए पूरी तैयारी कराई जाएगी।
शेष बचे 347 गांवों में सर्वे कर निरक्षरों को शिक्षित करने का काम इसी चरण में पूरा करने की योजना है। महीसागर को शत-प्रतिशत साक्षर ज़िला बनाने का यह संकल्प दर्शाता है कि जब प्रशासन, शिक्षक, विद्यार्थी और समाज एक साथ खड़े हों, तो निरक्षरता से लड़ाई जीती जा सकती है।
इनपुट: IANS



