गुजरात: एक सखी मंडल की कामयाबी, 5 हज़ार से शुरू कर 10 लाख का राखी कारोबार खड़ा किया
गुजरात सरकार की 'मिशन मंगलम' योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का ज़रिया बन रही है। इसी योजना की मदद से खेड़ा ज़िले के पीठाई गाँव की महिलाओं ने राखी बनाने का एक छोटा सा काम शुरू किया…
गुजरात सरकार की 'मिशन मंगलम' योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का ज़रिया बन रही है। इसी योजना की मदद से खेड़ा ज़िले के पीठाई गाँव की महिलाओं ने राखी बनाने का एक छोटा सा काम शुरू किया, जो आज लाखों के कारोबार में तब्दील हो चुका है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इन महिलाओं ने न सिर्फ़ अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी है, बल्कि वे अपने परिवार का एक मज़बूत सहारा भी बन गई हैं।
यह कहानी है संतराम सखी मंडल की, जिसकी शुरुआत 2014 में मीनाबेन डाभी ने सिर्फ़ 10 महिलाओं और 5,000 रुपए की पूँजी के साथ की थी। आज यह मंडल सालाना 10 लाख रुपए की राखियों का कारोबार कर रहा है और इससे 45 से ज़्यादा महिलाएँ जुड़ चुकी हैं। मीनाबेन डाभी ने IANS को बताया, "शुरुआत में मेरे साथ 10 बहनें थीं। मैंने उन्हें राखी बनाना सिखाया और काम शुरू किया। अब मेरे गृह उद्योग से 45 से ज़्यादा बहनें जुड़ गई हैं और सिर्फ़ राखी से हमारा टर्नओवर 10 लाख रुपए का है।"
घर बैठे आमदनी और बढ़ा आत्मविश्वास
इस सखी मंडल से जुड़ी महिलाओं के लिए यह काम महज़ एक कारोबार नहीं, बल्कि स्वाभिमान का प्रतीक है। मंडल की सदस्य प्रतिभा भट्ट बताती हैं, "मैं राखियाँ और पतंगें बनाने में मदद करती हूँ। इससे मुझे हर महीने तीन से चार हज़ार रुपए मिल जाते हैं, जिससे मैं अपने परिवार का गुज़ारा अच्छे से कर पा रही हूँ।" राखी बनाने के अलावा, बचे हुए समय में ये महिलाएँ पतंगें भी बनाती हैं और पशुपालन जैसे कामों में भी परिवार की मदद करती हैं।
हाथों से बनी राखियों की बढ़ी माँग
इस साल संतराम सखी मंडल ने लगभग 5 लाख राखियाँ तैयार की हैं। इनकी माँग सिर्फ़ खेड़ा-नाडियाद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गुजरात के अन्य शहरों से भी थोक खरीदार यहाँ आ रहे हैं। अहमदाबाद से आए एक होलसेल ग्राहक दर्शन सिंह डाभी ने कहा, "मैं यहाँ तीन-चार साल से आ रहा हूँ। ये बहनें हाथ से बहुत सुंदर राखियाँ बनाती हैं। मैं 10-15 हज़ार रुपए की राखियाँ ले जाऊँगा।"
स्थानीय ग्राहकों के अनुसार, इन राखियों की डिज़ाइन अनोखी, सुंदर और किफ़ायती होती है। एक ग्राहक इच्छाबेन ने कहा, "यहाँ रुद्राक्ष, गणपति वाली कई तरह की सुंदर राखियाँ हैं। इतने ज़्यादा डिज़ाइन हैं कि चुनना मुश्किल हो जाता है।" मंडल अब ऑनलाइन माध्यमों से भी अपनी राखियाँ बेच रहा है, जिससे ये देश-विदेश तक पहुँच रही हैं।
इनपुट: IANS



