गुजरात: एक साल में करीब 5 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन घटा, हरित ऊर्जा उत्पादन में बनाया रिकॉर्ड
गुजरात ने हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिससे वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'क्लीन एंड ग्रीन इंडिया' और 2070 तक 'नेट जीरो' उत्सर्जन के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है…
गुजरात ने हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिससे वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'क्लीन एंड ग्रीन इंडिया' और 2070 तक 'नेट जीरो' उत्सर्जन के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, राज्य ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 67,655 मिलियन यूनिट ग्रीन बिजली का रिकॉर्ड उत्पादन किया। इस वजह से कार्बन उत्सर्जन में 49.79 मिलियन टन की भारी कमी आई है।
आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में राज्य कुल 179 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में सफल रहा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में राज्य की नई ऊर्जा नीतियों और हरित निवेश को दिए जा रहे प्रोत्साहन को इस सफलता का श्रेय दिया जा रहा है। ये नीतियां सौर और पवन ऊर्जा के विस्तार पर केंद्रित हैं।
प्रमुख योजनाएं और नीतियां
इस उपलब्धि में केंद्र सरकार की 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' और 'पीएम कुसुम योजना' का भी बड़ा योगदान है। इन योजनाओं ने क्रमशः आम नागरिकों को घरों पर रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने और किसानों को खेतों में सोलर पंप स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इससे न केवल लाभार्थियों की आर्थिक बचत हुई है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिला है। इसके अलावा, राज्य सरकार की इंटीग्रेटेड रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी-2026 और ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी भी इस दिशा में अहम भूमिका निभा रही हैं।
अधिकारियों और लाभार्थियों का क्या कहना है
गुजरात के ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल ने बताया, "ग्रीन पावर जेनरेशन की वजह से हम 2025–2026 में 49.80 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम कर पाए हैं। हमने 67,655 मिलियन यूनिट बिजली का भी उत्पादन किया है।" वहीं, गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (GUVNL) की एमडी शालिनी अग्रवाल के अनुसार, "रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन एनर्जी और हाइड्रोजन जैसी नई-नई पहलें पूरे गुजरात में बड़े पैमाने पर लागू की जा रही हैं। इन सबके चलते गुजरात अभी पूरे भारत में रिन्यूएबल एनर्जी में पहले नंबर पर है। राज्य में अभी 52 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी का प्रोडक्शन हो रहा है।"
एक लाभार्थी भरतभाई पढ़ियार ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, "पहले मेरा बिजली बिल 6 से 7 हजार रुपये महीने आता था। सोलर सिस्टम लगवाने के बाद, जिसमें 50 प्रतिशत सब्सिडी मिली, अब हमारा बिजली बिल जीरो हो गया है।" इसी तरह, एक किसान लाभार्थी खलपाभाई चौधरी ने कहा, "सोलर पंप से हमें लगातार पानी मिल रहा है और बिजली बिल भरने के झंझट से मुक्ति मिल गई है।"
इन समन्वित प्रयासों के बल पर गुजरात 2030 तक 100 गीगावाट (GW) नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है और देश में एक मॉडल राज्य के रूप में उभर रहा है।
इनपुट: IANS



