गुरूवार, 20 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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गुजरात: कच्छ में रेल नेटवर्क हुआ और मजबूत, सामाख्याली-भचाऊ दोहरीकरण का काम पूरा

गुजरात के कच्छ क्षेत्र में माल ढुलाई और यात्री ट्रेनों के संचालन को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पश्चिम रेलवे ने सामाख्याली और भचाऊ के बीच लगभग 17 किलोमीटर लंबे रेल खंड के दोहरीकरण…

गुजरात: कच्छ में रेल नेटवर्क हुआ और मजबूत, सामाख्याली-भचाऊ दोहरीकरण का काम पूरा
(फोटो: IANS)

गुजरात के कच्छ क्षेत्र में माल ढुलाई और यात्री ट्रेनों के संचालन को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पश्चिम रेलवे ने सामाख्याली और भचाऊ के बीच लगभग 17 किलोमीटर लंबे रेल खंड के दोहरीकरण (चौड़ीकरण) का काम पूरा कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस महत्वपूर्ण परियोजना के पूरा होने से कच्छ के औद्योगिक क्षेत्रों और कांडला व मुंद्रा जैसे प्रमुख बंदरगाहों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

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रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस नवनिर्मित ट्रैक का निरीक्षण शुरू कर दिया है। इसी क्रम में वेस्टर्न सर्कल के कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) ई श्रीनिवास की टीम ने ट्रैक, सिग्नल उपकरण, पुल, एलसी गेट, आरओबी और इलेक्ट्रिक पावर सप्लाई की बॉन्डिंग का बारीकी से निरीक्षण किया। CRS की अंतिम स्वीकृति रिपोर्ट मिलने के बाद इस नए खंड पर मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा।

परियोजना का पैमाना और निर्माण

इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 32.90 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाई गई है, जिसमें 16.398 किलोमीटर डाउन लाइन और 16.502 किलोमीटर अप लाइन शामिल है। निर्माण कार्य के दौरान 6.25 लाख घन मीटर मिट्टी का काम, 1.27 लाख घन मीटर ब्लैंकेटिंग और 0.96 लाख घन मीटर बैलास्ट बिछाने का काम किया गया। रेलवे के अनुसार, भारी यातायात को देखते हुए इस सेक्शन पर 4 बड़े और 25 छोटे पुल भी बनाए गए हैं। साथ ही, सामाख्याली, वोंध और भचाऊ स्टेशनों पर भी ज़रूरी बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है।

आर्थिक और रणनीतिक महत्व

डीआरएम वेद प्रकाश ने इस खंड के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि कांडला पोर्ट, मुंद्रा पोर्ट और भुज क्षेत्र के उद्योगों का माल पूरे देश में पहुंचाने के लिए यह रेल लाइन बेहद ज़रूरी है। सामाख्याली-भचाऊ रेल खंड भुज और गांधीधाम जैसे इलाकों के लिए भी माल परिवहन का मुख्य मार्ग है।

पश्चिम रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) प्रदीप गुप्ता के अनुसार, यह परियोजना सामाख्याली से गांधीधाम तक के पूरे खंड को पूरा करने के मास्टरप्लान का एक हिस्सा है, जिसका एक चरण अब पूरा हो चुका है। इस परियोजना से न केवल रेलवे की माल परिवहन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि लॉजिस्टिक लागत में कमी आने से स्थानीय व्यापार और निर्यात को भी सीधा फायदा होगा।

इनपुट: IANS

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News4Social गुजरात डेस्क

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