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गुजरात: 19 साल में 2 करोड़ इमरजेंसी कॉल, जीवनरेखा बनी 108 एम्बुलेंस सेवा

गुजरात की ‘108 इमरजेंसी मेडिकल सर्विस’ पिछले 19 वर्षों में राज्य के नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा बनकर उभरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 अगस्त 2007 को मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू की…

गुजरात: 19 साल में 2 करोड़ इमरजेंसी कॉल, जीवनरेखा बनी 108 एम्बुलेंस सेवा
(फोटो: IANS)

गुजरात की ‘108 इमरजेंसी मेडिकल सर्विस’ पिछले 19 वर्षों में राज्य के नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा बनकर उभरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 अगस्त 2007 को मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू की गई यह सेवा अब अपने 20वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस सेवा ने अब तक 19.66 लाख से ज़्यादा लोगों की जान बचाने में सफलता पाई है।

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यह सिर्फ़ एक एम्बुलेंस सेवा नहीं, बल्कि अस्पताल पहुंचने से पहले मरीज़ को मिलने वाली ‘प्री-हॉस्पिटल केयर’ की एक व्यापक व्यवस्था है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में यह सेवा लगातार आधुनिक हो रही है और इसमें एयर एम्बुलेंस और बोट एम्बुलेंस जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं।

सेवा का विशाल नेटवर्क और प्रभाव

जीवीआर ईएमआरआई के चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफिसर जसवंत प्रजापति ने बताया कि पूरे राज्य में लगभग 1,500 एम्बुलेंस 24 घंटे कार्यरत हैं। इनमें करीब 800 रोड एम्बुलेंस, 38 ‘आईसीयू ऑन व्हील्स’, दो बोट एम्बुलेंस और एक एयर एम्बुलेंस शामिल हैं। इसके अलावा, मरीज़ों को बेहतर ट्रांसपोर्ट सुविधा देने के लिए 586 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की एम्बुलेंस को भी इससे जोड़ा गया है।

आंकड़ों के अनुसार, 19 वर्षों में अगस्त 2026 तक कुल 1.99 करोड़ से अधिक इमरजेंसी मामलों में सेवा प्रदान की गई। इनमें 1.96 करोड़ से अधिक मेडिकल, 2.55 लाख पुलिस संबंधी और 8 हजार से अधिक आग लगने की घटनाएं शामिल हैं। इस दौरान एम्बुलेंस वाहनों ने 62 करोड़ किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की है।

किस तरह के मामलों में मिली मदद?

इस सेवा ने विभिन्न आपातकालीन स्थितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 19 वर्षों में 62.97 लाख से अधिक गर्भावस्था और प्रसूति संबंधी मामलों में सहायता पहुंचाई गई। इसके अलावा, सड़क दुर्घटना के 24.18 लाख, सांस की गंभीर समस्याओं के 11.77 लाख और हार्ट अटैक के 9.87 लाख से अधिक मामलों में मरीज़ों को ‘गोल्डन आवर’ में अस्पताल पहुंचाया गया।

लोगों के अनुभव और सेवा की कुशलता

एक लाभार्थी अशोक साधु ने IANS से कहा, “जिस प्रकार 108 मनकों की माला का आध्यात्मिक महत्व है... वैसे ही 108 एम्बुलेंस इतनी जल्दी आ जाती है कि मानो देवदूत मदद के लिए आ गए हों।” एक अन्य लाभार्थी महबूब अली ने बताया कि कॉल करने पर एम्बुलेंस समय पर आई और बेहतर सुविधा प्रदान की, जिससे वे अपने बेटे को समय पर अस्पताल ले जा सके।

इस सेवा की सफलता के पीछे इसकी तकनीकी दक्षता भी है। पूरे राज्य में हर 21 सेकंड में एक एम्बुलेंस किसी इमरजेंसी के लिए रवाना होती है, और इसका औसत रिस्पॉन्स टाइम 13 मिनट 9 सेकंड है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों से भी बेहतर है। एम्बुलेंस ड्राइवर राजेंद्र सिंह सोढा के मुताबिक, जीपीएस सिस्टम और रास्तों की जानकारी के कारण वे मरीज़ तक तेज़ी से पहुंच पाते हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social गुजरात डेस्क

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