ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो: 900 करोड़ की परियोजना पर आज अहम बैठक, लाखों लोगों की उम्मीदें दाँव पर
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लाखों लोगों के लिए सार्वजनिक परिवहन की सबसे बड़ी उम्मीद, प्रस्तावित मेट्रो परियोजना, आज एक अहम पड़ाव पर है। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) सोमवार को…
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लाखों लोगों के लिए सार्वजनिक परिवहन की सबसे बड़ी उम्मीद, प्रस्तावित मेट्रो परियोजना, आज एक अहम पड़ाव पर है। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) सोमवार को दिल्ली में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के समक्ष इस परियोजना पर एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण देंगे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह प्रस्तुतीकरण पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) की बैठक में होगा, जिसे परियोजना की अंतिम मंजूरी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह मेट्रो लाइन नोएडा के सेक्टर-51 स्टेशन को ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 से जोड़ेगी। इस पूरे कॉरिडोर के निर्माण पर लगभग 900 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। यदि इस परियोजना को हरी झंडी मिलती है, तो यह इस तेजी से बढ़ते आवासीय क्षेत्र के लिए एक बड़ी सौगात होगी।
क्यों ज़रूरी है यह मेट्रो लाइन?
पिछले कुछ सालों में ग्रेटर नोएडा वेस्ट देश के सबसे सघन आबादी वाले रिहायशी इलाकों में से एक बनकर उभरा है। यहाँ सैकड़ों बहुमंजिला सोसायटियों में बड़ी संख्या में परिवार रहते हैं, लेकिन सार्वजनिक परिवहन के विकल्प बेहद सीमित हैं। यहाँ के निवासियों को नोएडा, दिल्ली और गाजियाबाद आने-जाने के लिए काफी हद तक निजी वाहनों, कैब या शेयर्ड ऑटो पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव और यात्रा का समय दोनों बढ़ता है।
मेट्रो आने से क्या बदलेगा?
इस कॉरिडोर के शुरू होने से न सिर्फ लाखों दैनिक यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि सेक्टर-51 के जरिए वे सीधे दिल्ली मेट्रो नेटवर्क से भी जुड़ जाएँगे। इससे दिल्ली-एनसीआर के किसी भी हिस्से तक पहुँचना तेज़, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से क्षेत्र में रियल एस्टेट और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, सार्वजनिक परिवहन के उपयोग से प्रदूषण और ईंधन की खपत में कमी आने की भी उम्मीद है।
इनपुट: IANS



