भारतीय स्पेस सेक्टर में बड़ी उछाल की उम्मीद, अगले 7 साल में 5 गुना बढ़ सकती है वैश्विक हिस्सेदारी: अमेरिकी रिपोर्ट
भारत का प्राइवेट स्पेस सेक्टर आने वाले समय में एक बड़ी छलांग लगा सकता है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत अगले पांच से सात सालों में वैश्विक अंतरिक्ष बाजार (Global Space…
भारत का प्राइवेट स्पेस सेक्टर आने वाले समय में एक बड़ी छलांग लगा सकता है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत अगले पांच से सात सालों में वैश्विक अंतरिक्ष बाजार (Global Space Market) में अपनी हिस्सेदारी को पांच गुना तक बढ़ा सकता है। यह बढ़ोतरी भारत सरकार की नई नीतियों और अमेरिका के साथ गहरे होते रिश्तों का नतीजा होगी।
समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से भी कम है, लेकिन यह जल्द ही 10 प्रतिशत के आँकड़े तक पहुँच सकती है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने अपने अगस्त के 'एयरोस्पेस एंड डिफेंस एक्सपोर्टर अलर्ट' में भारत के स्पेस सेक्टर को 'मार्केट ऑफ द मंथ' का दर्जा दिया है, जो यहाँ मौजूद अवसरों को दर्शाता है।
भारत-अमेरिका सहयोग और नए अवसर
रिपोर्ट में अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत में निवेश के मौकों पर खास जोर दिया गया है। इनमें सैटेलाइट सिस्टम, एडवांस्ड स्पेसफ्लाइट, कनेक्टिविटी, और मैन्युफैक्चरिंग जैसी टेक्नोलॉजी शामिल हैं। भारत और अमेरिका का अंतरिक्ष सहयोग काफी पुराना है, जिसकी शुरुआत 1963 में अमेरिका निर्मित 'नाइक-अपाचे' रॉकेट के लॉन्च से हुई थी। तब से लेकर आज तक, नासा और अमेरिकी कंपनियों ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को तकनीक और उपकरण मुहैया कराए हैं।
यह सहयोग अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहाँ भारत के नए स्पेस स्टार्टअप्स अमेरिका में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इस रिश्ते को मजबूत करने के लिए 'अमेरिका-इंडिया सिविल स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप' और 2025 में शुरू की गई 'ट्रस्ट' जैसी पहलें काम कर रही हैं।
व्यापारिक बाधाओं को दूर करने की कोशिश
दोनों देशों की कंपनियों के सामने आने वाली व्यापारिक बाधाओं को दूर करने के लिए एक 'कमर्शियल स्पेस सब-वर्किंग ग्रुप' भी बनाया गया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग और भारत का अंतरिक्ष विभाग मिलकर इसका नेतृत्व करते हैं। इसका काम बाजार तक पहुँच, खरीद, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और निर्यात नियंत्रण जैसे मुद्दों को सुलझाना है।
इस क्षेत्र में बढ़ते अवसरों को देखते हुए, अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने अमेरिकी कंपनियों से आग्रह किया है कि वे 7 से 9 सितंबर के बीच होने वाले 'बेंगलुरु स्पेस एक्सपो' में ज़रूर हिस्सा लें। यह एक्सपो भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को अपनी क्षमताएं दिखाने का एक बड़ा मंच प्रदान करेगा।
इनपुट: IANS



