उरुग्वे के विदेश मंत्री ने की भारत की सराहना, कहा — ग्लोबल साउथ का प्रमुख नेता है भारत
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी के बाद भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता की सराहना हो रही है। उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने ग्लोबल साउथ में भारत को एक प्रमुख नेता बताते हुए कहा है कि…
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी के बाद भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता की सराहना हो रही है। उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने ग्लोबल साउथ में भारत को एक प्रमुख नेता बताते हुए कहा है कि सम्मेलन का नतीजा बेहद सफल रहा, जिसमें एक गंभीर, ठोस और आम सहमति वाला घोषणा पत्र जारी किया गया। समाचार एजेंसी IANS के साथ एक विशेष बातचीत में उन्होंने भारत और उरुग्वे के बीच द्विपक्षीय संबंधों से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक भूमिका तक कई मुद्दों पर अपनी राय रखी।
विदेश मंत्री लुबेटकिन ने अपनी भारत यात्रा के तीन प्रमुख उद्देश्य गिनाए: भारत सरकार के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेना, और भारत तथा मर्कोसुर (दक्षिण अमेरिकी देशों का व्यापारिक गुट) के बीच संबंधों को आगे बढ़ाना।
ब्रिक्स में भारत की भूमिका और पीएम मोदी का नेतृत्व
ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता का श्रेय भारत को देते हुए लुबेटकिन ने कहा, "दुनिया में चल रहे कुछ युद्धों और संघर्षों में अलग-अलग पक्ष शामिल हैं, लेकिन मुझे लगता है कि बैठक के अध्यक्ष के रूप में भारत के राष्ट्रपति और भारत सरकार ने सभी पक्षों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने और सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।" उन्होंने इस उपलब्धि को भारत के बढ़ते कद का प्रतीक बताया और कहा कि यह दिखाता है कि "आज के समय में खासकर ग्लोबल साउथ में भारत प्रमुख नेताओं में से एक है।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर उन्होंने कहा कि सम्मेलन की सफलता प्रधानमंत्री मोदी की भी सफलता है। लुबेटकिन ने कहा, "बैठक के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि 'सभी मुद्दों पर सहमति' बन गई है। मेरे हिसाब से यह बात बताती है कि इस समय वैश्विक स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी की क्या भूमिका और महत्व है।"
भारत-उरुग्वे संबंधों का भविष्य
लुबेटकिन ने दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर गहरा विश्वास जताया। उन्होंने कहा, "मैं पूरी तरह उम्मीद से भरा हूं, क्योंकि मुझे लगता है कि हमारे दोनों देश कई मायनों में एक-दूसरे के पूरक हैं।" उन्होंने सहयोग के लिए तीन रास्ते बताए:
- द्विपक्षीय संबंध: अर्थव्यवस्था, संस्कृति, फिल्म (बॉलीवुड सहित), खेल और अन्य क्षेत्रों में सहयोग।
- भारत-मर्कोसुर संबंध: उन्होंने बताया कि भारत और मर्कोसुर के बीच बातचीत का अगला चरण शुरू करने पर सहमति बनी है, जो अर्जेंटीना, ब्राजील और पराग्वे के लिए भी महत्वपूर्ण है।
- क्षेत्रीय सहयोग: उरुग्वे अभी मर्कोसुर और 'सेलाक' (33 लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों का समूह) दोनों की अध्यक्षता कर रहा है। इससे भारत और पूरे क्षेत्र के बीच संबंधों को मजबूत करने का एक बड़ा अवसर मिला है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने पहली बार उरुग्वे में अपना दूतावास खोला है, जो रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विदेश मंत्री लुबेटकिन ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपनी मुलाकात को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि दोनों देश अब अपने रिश्तों को और गहरा तथा व्यापक बनाने पर सहमत हैं।
इनपुट: IANS



