GDP ग्रोथ 7.8% तो महंगाई और बेरोज़गारी पर सरकार जवाब दे: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा
कांग्रेस ने देश की 7.8% जीडीपी वृद्धि दर को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने कहा कि केवल एक तिमाही के आर्थिक विकास के आंकड़ों से आम जनता की समस्याएं हल नहीं हो जातीं। समाचार एजेंसी IANS…
कांग्रेस ने देश की 7.8% जीडीपी वृद्धि दर को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने कहा कि केवल एक तिमाही के आर्थिक विकास के आंकड़ों से आम जनता की समस्याएं हल नहीं हो जातीं। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि सरकार को महंगाई, बेरोज़गारी, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की स्थिति पर जवाब देना चाहिए।
खेड़ा ने सवाल उठाया कि अगर अर्थव्यवस्था इतनी तेज़ी से बढ़ रही है, तो देश की एक बड़ी आबादी को अब भी मुफ्त राशन पर क्यों निर्भर रहना पड़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जीडीपी ग्रोथ को बड़ी उपलब्धि बताए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि इस वृद्धि का लाभ किसानों, युवाओं और आम परिवारों तक कितना पहुँचा है।
महंगाई और रोज़गार पर सवाल
पवन खेड़ा ने दूध, चीनी, पेट्रोल-डीजल जैसी ज़रूरी चीज़ों की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए कहा कि आम परिवारों का घरेलू बजट लगातार बिगड़ रहा है। उन्होंने मुंबई में दूध की कीमत में 9 रुपये प्रति लीटर और दिल्ली में सीएनजी के दाम में 3 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि का भी उल्लेख किया।
खेड़ा ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “यदि जीडीपी इतनी मजबूत है तो दूध की हर थैली के साथ जीडीपी का आंकड़ा भी छाप देना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को कीमत बढ़ने के साथ यह बताया जा सके कि अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है।” उन्होंने सरकार से पूछा कि जीडीपी बढ़ने से युवाओं की रोज़गार संबंधी समस्याओं का कितना समाधान हुआ है।
अर्थव्यवस्था और आम आदमी
कांग्रेस सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री को केवल यह कहने के बजाय कि देश निराश न हो, जनता की वास्तविक परेशानियों पर बात करनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस बयान की भी आलोचना की जिसमें उन्होंने कुछ लोगों पर निराशावादी माहौल बनाने और 'झूठ की गूंज' फैलाने का आरोप लगाया था। खेड़ा ने दावा किया कि समाज के हर वर्ग में आर्थिक दबाव है।
खेड़ा ने सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल खड़े किए। प्रधानमंत्री मोदी के 'युद्ध मानवता को पीछे ले जाता है' वाले बयान का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में भारत के रुख के कारण, दुनिया में उसकी सलाह को कितनी गंभीरता से लिया जाएगा, यह एक महत्वपूर्ण सवाल है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आर्थिक विकास तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।
इनपुट: IANS



