शालीमार बाग में मस्जिद का हिस्सा तोड़े जाने पर मुस्लिम नेताओं ने उठाए सवाल, कहा- 'इबादत से रोकने की कोशिश'
दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर एक मस्जिद का हिस्सा गिराए जाने की घटना पर कई मुस्लिम नेताओं और संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए आरोप…
दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर एक मस्जिद का हिस्सा गिराए जाने की घटना पर कई मुस्लिम नेताओं और संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए आरोप लगाया है कि यह मुसलमानों में डर पैदा करने और उन्हें इबादत से रोकने की एक कोशिश है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेताओं ने रात के अंधेरे में की गई इस कार्रवाई के समय पर भी सवाल उठाए हैं।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि भाजपा शासन में अवैध निर्माण के बहाने मस्जिदों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "अगर कोई गलत या अवैध तरीके से निर्माण हुआ है तो उसे रात में तोड़ने की क्या जरूरत थी। प्रशासन को पूरे सबूतों के साथ दिन में आना चाहिए था।"
न्यायिक प्रक्रिया और राजनीति पर सवाल
इस मामले में अलग-अलग नेताओं ने सरकार की मंशा और न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर मलिक मोतसिम खान ने कहा कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है और नगर निगम को फैसले का इंतजार करना चाहिए था। उन्होंने जयपुर, सहारनपुर और फरीदाबाद की घटनाओं का जिक्र करते हुए इसे मस्जिदों को निशाना बनाने की एक मुहिम बताया और कहा, "हम न्यायिक कार्रवाई करेंगे और अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।"
वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इसे सरकार की "नफरत की राजनीति" करार दिया। उन्होंने कहा, "इस सरकार के पास काम गिनाने के लिए कुछ नहीं है... अब इनके पास एक सूत्री कार्यक्रम है कि मुस्लिम धार्मिक स्थलों को तोड़िए, बुलडोजर चलाइए, मुसलमानों को प्रताड़ित करिए, तब जाकर लोगों का मुद्दा डायवर्ट हो।"
मौके पर तनाव और आरोप
AIMIM की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष शोएब जमाई ने आरोप लगाया कि मामला कोर्ट में होने के बावजूद यह कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि सहारनपुर जैसी घटना को दिल्ली में दोहराने की कोशिश की गई, जहाँ रात में मस्जिद गिरा दी गई थी। जमाई ने बताया, "पुलिस ने हमें गिरफ्तार करने की कोशिश की। लाइटें बंद करके पूरे इलाके को भारी सुरक्षा घेरे में बदल दिया गया था।" उन्होंने यह भी कहा कि उनकी टीम के हस्तक्षेप से पवित्र कुरान को मलबे में दबने से पहले सुरक्षित निकाल लिया गया।
इनपुट: IANS



