स्वतंत्रता सेनानी ने बताया कि कैसे अंग्रेज ‘भारत माता की जय’ बोलने पर भी करते थे प्रताड़ित?

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अंग्रेजों ने भारत पर शासन करने के समय कई स्वतंत्रता सेनानियों को प्रताड़ित किया था। जैसा कि हम जानते हैं उनमे से कुछ लोगों को जेल में डाल दिया जाता था और उसके बाद उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया जाता था। भारत की आजादी में ऐसे असंख्य वीरों ने बलिदान दिए हैं जिन्हें शायद पन्नों पर दर्ज़ नहीं किया गया है। ऐसी ही अंग्रेजों के जुल्मों की कहानी सुनाई है मुज्जफरपुर के स्वतंत्रता सेनानी बिरेन्द्र कुमार मुखर्जी ने। आइये जानते हैं-

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बिरेंद्र कुमार मुखर्जी एक स्वतंत्रता सेनानी रहें हैं उनकी उम्र इस समय 93 वर्ष की है। उन्होंने बताया कि कैसे अंग्रेजो भारत छोड़ो’ का नारा लगाने पर लाल पगड़ी वाले सिपाही स्वतंत्रता सेनानियों की पिटाई करते थे। उन्होंने आगे बताया कि अगर कोई ‘भारत माता की जय’ बोलता था तो उसकी भी पिटाई होती थी। बिरेन्द्र कुमार ने खुद बताया कि कैसे उन्हें बिहार के मुजफ्फरपुर थाने में झंडा फहराते समय गिरफ्तार कर मोतिहारी जेल में बंद कर दिया गया था।

बिरेंद्र कुमार मुखर्जी ने कहा कि जब भी स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस का दिन आता है तो अंग्रेजी हुकुमत का वो खौफ याद आता है, लेकिन हम लोगों ने भी हार नहीं मानी और उन्हें खदेड़कर ही माने। अतीत में जाते ही लाल पगड़ी का खौफ आज भी साफ दिखाई देता है।

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बिरेन्द्र कुमार मुखर्जी जब चौदह साल के थे तब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा चलाये गए ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ के नारे से प्रेरित होकर आजादी की लड़ाई में कूद गए। इस समय मुखर्जी जी विनायका स्थित कल्पतरु अपार्टमेंट में अपनी पत्नी कविता बनर्जी के साथ रहते हैं। उनका एक बेटा है, जो अमेरिका में रहता है। उन्होंने अंग्रेजों के जुल्म की इंतिहा को बताते हुए कहा कि उस समय अगर कोई आदमी अपराध कर देता था तो अंग्रेज उसके गाँव में आकर औरतों और महिलाओं पर बहुत अत्याचार करते थे।

बिरेन्द्र कुमार मुखर्जी में आजादी का वह जूनून आज भी बरक़रार है। उन्होंने बताया कि उन्हें स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस पर कोई बुलाये या न बुलाये वह फिर झंडा फहराने चले जाते हैं। वह 15 अगस्त को कलेक्ट्रेट ऑफिस में जाकर झंडारोहण कार्यक्रम में शामिल होते हैं।