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पढ़ियें, एक पिता की गुहार!

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पढ़ियें, एक पिता की गुहार!
पढ़ियें, एक पिता की गुहार!

देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार को सुपरबाइक की वजह से एक पिता ने अपने जवान बेटे को हमेशा के लिए खो दिया। बेटे के मौत के बाद पूरे परिवार का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है। बेटे के मौत के बाद उसके पिता ने दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार से एक गुहार लगाई है, आइयें जानते है बेबस पिता ने क्या गुहार की है?

पिता की गुहार

दिल्ली के मंडी हाउस में बीते सोमवार को हिमांशु की तेज रफ्तार की वजह से मौत होने के कारण, उसके पिता ने सरकार से भावुक होकर एक अपील की है। मृतक हिमांशु के पिता ने कहा कि मेरा बेटा तेज रफ्तार का शिकार हो गया, जिसकी वजह से वो अब हम सबके साथ नहीं है, लेकिन फिर से किसी का बेटा इस तरह के हादसों का शिकार न हो जाए, इसलिए मैं सरकार से अपील करता हुँ कि राजधानी दिल्ली में सुपर-बाइक पर रोक लगा दी जाए, ताकि फिर ले किसी का बेटा इसका शिकार न हो। रोते हुए मृतक के पिता ने यह भी कहा कि इस तरह की बाइक भारत देश के लिये नहीं, यह तो विदेशों के लिए है, वहां की जनसंख्या भी कम है, लेकिन भारत में खासकर दिल्ली बहुत भीड़-भाड़ वाला इलाका है, इसलिए यहाँ सुपर-बाइक पर प्रतिबंध लगा देनी चाहिए।

क्या था पूरा मामला

बीते सोमवार को राजधानी दिल्ली के मंडी हाउस इलाकें में सुपर-बाइक पर रेस लगाने की वजह से हिमांशु नामक युवक की मौत हो गई। खबर के मुताबिक, हिमांशु बाइक पर रेस लगा रहा था कि तभी अचानक एक बुजुर्ग सामने आ गया था, जिससे उसने अपना नियंत्रण खो दिया और बाइक दिवार से टकरा गई, जिसकी वजह से हिमांशु की मौत हो गई थी।

पुलिस ने मामलें में क्या कहा

आपको बता दें कि पुलिस का कहना है कि हिमांशु बाइक को 150 की रफ्तार से भगा रहा था, जिसकी वजह से उसने अपना नियंत्रण खो दिया। पुलिस के मुताबित, हिमांशु की मौत तेज रफ्तार की वजह से हुई।

हिमांशु के परिवार वालों ने क्या कहा
हिमांशु के बड़े भाई अंकुश का कहना है कि तेज रफ्तार की वजह से हिमांशु की जान नहीं गई, हिमांशु की बाइक की रफ्तार सिर्फ 80 थी, बुजुर्ग को बचाने में हिमांशु की जान गई है।

जिद ने ली बेटे की जान
अक्सर बच्चें माँ-बाप से जिद करते है, और मां-बाप उनके जिद के आगे झुक जाते है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता है कि जिद जानलेवा भी साबित हो सकती है, यहीं हुआ है हिमांशु के साथ। हिमांशु ने घरवालों से जिद की सुपरबाइक लेने के लिए, और घरवालों ने उसकी जिद पूरी कर दी। लेकिन घरवालों को क्या पता था कि बेटे की जिद, बेटे को ही उनसे छीन लेगी।

बच्चों के जिद पर न झुके अभिभावक

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अभिभावकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों की हर जिद पर न झुके वरना हो सकता है कि अंजाम और भी बुरा हो। बच्चों की जिद में पहले यह देखे कि उनकी यह जिद उनके लिए कितना सही है, अगर जिद ऐसी है कि बच्चें मुसीबत में पड़ जाए, तो उस जिद को नजरअंदाज कर देना चाहिए। अपना और अपने बच्चों को ध्यान रखें।

बहरहाल, मृतक हिमांशु के पिता की गुहार पर सरकार को गौर करना चाहिए, लेकिन अभिभावकों को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि उनके बच्चें के लिए क्या सही है या गलत, इससे बच्चों को अवगत कराना चाहिए।

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