यौन अपराधों में जल्द न्याय के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट योजना को मिला 5 साल का विस्तार
महिलाओं और बच्चों से जुड़े यौन अपराध के मामलों में न्याय प्रक्रिया को तेज करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने फास्ट-ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना को 31 मार्च 2031…
महिलाओं और बच्चों से जुड़े यौन अपराध के मामलों में न्याय प्रक्रिया को तेज करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने फास्ट-ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विस्तार 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और अगले पांच वर्षों तक चलेगा।
इस योजना की शुरुआत साल 2019 में दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) अधिनियम, 2012 के तहत दर्ज मामलों के त्वरित निपटारे के लिए की गई थी। इसके बाद इसे दो बार विस्तार दिया जा चुका है और यह तीसरी बार है जब योजना को आगे बढ़ाया गया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से लंबित मामलों का बोझ घटेगा और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा।
कोर्ट की संख्या और प्रदर्शन
विस्तारित योजना के तहत देशभर में 850 फास्ट-ट्रैक स्पेशल कोर्ट संचालित करने का लक्ष्य है, जिनमें विशेष पॉक्सो अदालतें भी शामिल होंगी। वर्तमान में, 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 779 ऐसी अदालतें काम कर रही हैं, जिनमें 399 विशेष तौर पर पॉक्सो मामलों के लिए हैं। सरकार लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए और भी जिलों को इस योजना के दायरे में लाने पर विचार कर रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन अदालतों ने लगातार महत्वपूर्ण संख्या में मामलों का निपटारा किया है। साल 2025 में 775 FTSC ने लगभग 66,500 मामलों का फैसला सुनाया, जबकि वर्ष के अंत में करीब 2.45 लाख मामले लंबित थे। इससे पहले, इन विशेष अदालतों ने वर्ष 2024 में 85,595 और 2023 में 76,319 मामलों का निस्तारण किया था।
वित्तीय सहायता और उद्देश्य
इस योजना के तहत केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस मदद में न्यायिक अधिकारियों और सहायक कर्मचारियों के वेतन के साथ-साथ अदालतों के रोजमर्रा के संचालन का खर्च भी शामिल होता है। योजना की शुरुआत से अब तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कुल 1,259.51 करोड़ रुपए की राशि जारी की जा चुकी है।
इनपुट: IANS



