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वित्तीय धोखाधड़ी: ओडिशा-बंगाल में ED की बड़ी कार्रवाई, 4.5 करोड़ फ्रीज और वन्यजीव अवशेष बरामद

निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का झांसा देकर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी करने के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 11 ठिकानों पर एक साथ तलाशी…

वित्तीय धोखाधड़ी: ओडिशा-बंगाल में ED की बड़ी कार्रवाई, 4.5 करोड़ फ्रीज और वन्यजीव अवशेष बरामद
(फोटो: IANS)

निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का झांसा देकर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी करने के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 11 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया, जिसमें कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला 'कल्पना फाइनेंशियल सर्विसेज' और उससे जुड़ी अन्य कंपनियों द्वारा चलाई जा रही एक कथित निवेश योजना से संबंधित है।

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ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत यह छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान, एजेंसी ने विभिन्न बैंकों के 36 खातों में जमा लगभग 4.5 करोड़ रुपए की राशि और एक बैंक लॉकर को फ्रीज कर दिया है। इसके अलावा तलाशी में कई डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

वन्यजीव अवशेषों की बरामदगी

छापेमारी के दौरान एक आरोपी ईश्वर चंद्र बिंधानी के घर से कुछ संदिग्ध वस्तुएं मिलीं, जिनके वन्यजीव अवशेष होने का शक था। ईडी ने तुरंत इसकी सूचना बारीपदा के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (डीएफओ) को दी। वन विभाग की टीम ने जांच के बाद पुष्टि की कि इन अवशेषों में हाथी के दो जबड़े और एक हड्डी के साथ-साथ सांभर हिरण के छह सींगों के टुकड़े शामिल हो सकते हैं। इस मामले में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत अलग से कार्रवाई की गई है।

क्या है धोखाधड़ी का यह मामला?

ईडी की यह जांच ओडिशा पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज एक FIR पर आधारित है। यह एफआईआर अमित मंडल, संजय कुमार सामल, ईश्वर चंद्र बिंधानी समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज की गई थी। आरोप है कि इन लोगों ने शेयर बाजार और ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर लोगों को हर महीने 3.5% से 7% तक के निश्चित रिटर्न का लालच दिया था।

एजेंसी की जांच में सामने आया कि अमित मंडल ने 'कल्पना कंसल्टेंसी सर्विसेज' और 'मुरली कंसल्टेंसी सर्विसेज' जैसी फर्मों के जरिए यह योजना चलाई। निवेशकों को फंसाने के लिए एजेंटों का एक नेटवर्क बनाया गया था, जो प्रचार बैठकें, व्हाट्सएप और रेफरल के जरिए लोगों को आकर्षित करते थे। निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए उन्हें समझौते और भविष्य की तारीख वाले चेक भी दिए जाते थे। जांच के मुताबिक, इस योजना के तहत संदिग्धों के खातों में करीब 120 करोड़ रुपए जमा हुए थे। हालांकि, जुलाई 2024 के आसपास निवेशकों को रिटर्न और मूलधन का भुगतान बंद कर दिया गया।

मुख्य आरोपी बेंगलुरु से मिला

जब ईडी की टीम पश्चिम बंगाल के बांकुरा में अमित मंडल के कार्यालय पहुंची, तो पता चला कि वह वहां से फरार हो चुका था। तकनीकी निगरानी के जरिए उसकी लोकेशन कर्नाटक के बेंगलुरु में पाई गई। एजेंसी ने उसे ढूंढ निकाला और PMLA के तहत उसका बयान दर्ज किया। ईडी ने बताया है कि मामले में आगे की जांच जारी है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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