गुजरात: गैंगस्टर सुरेश पटेल पर ED का शिकंजा, 6.5 करोड़ रुपये से ज़्यादा की 17 संपत्तियां ज़ब्त
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुजरात के आपराधिक पृष्ठभूमि वाले कारोबारी सुरेश जगुभाई पटेल उर्फ सूखा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक और बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, एजेंसी ने…
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुजरात के आपराधिक पृष्ठभूमि वाले कारोबारी सुरेश जगुभाई पटेल उर्फ सूखा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक और बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, एजेंसी ने पटेल और अन्य से जुड़ी 17 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है, जिनकी कुल कीमत लगभग 6.52 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह कार्रवाई 8 सितंबर, 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई।
कुर्क की गई ये संपत्तियां दमन और वलसाड में स्थित हैं। ईडी की यह जांच सुरेश पटेल और उसके सहयोगियों के खिलाफ दमन पुलिस, गुजरात पुलिस और मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज कई FIR पर आधारित है। पटेल पर भ्रष्टाचार, अवैध हथियार रखने, हत्या, जबरन वसूली और धोखाधड़ी जैसे कई गंभीर आरोप हैं।
व्यापार पर एकाधिकार और आपराधिक दबदबा
ईडी की जांच से पता चला है कि सुरेश पटेल ने अपने आपराधिक रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर दमन में स्क्रैप ट्रेडिंग और ट्रांसपोर्ट सेवाओं के कारोबार पर अपना एकाधिकार स्थापित कर लिया था। वह धमकी, डराने और बाहुबल का इस्तेमाल कर अपने प्रतिद्वंद्वी व्यापारियों को बाजार से बाहर कर देता था और पूरे कारोबार पर अपना कब्जा बनाए हुए था।
मामले में अब तक की कार्रवाई
यह इस मामले में ईडी की पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले एजेंसी ने तलाशी अभियान के दौरान 2.90 करोड़ रुपये नकद और बैंक बैलेंस जब्त/फ्रीज किए थे। साथ ही, दमन और मुंबई में स्थित 4.42 करोड़ रुपये मूल्य की 24 अचल संपत्तियों को भी कुर्क किया गया था, जिसकी पुष्टि पीएमएलए के निर्णायक प्राधिकरण, नई दिल्ली ने भी की थी। इस नवीनतम कुर्की के साथ, मामले में अब तक जब्त, कुर्क और फ्रीज की गई कुल संपत्ति का मूल्य 13.85 करोड़ रुपये हो गया है।
ईडी इस मामले में 27 नवंबर, 2024 को ही दमन की विशेष पीएमएलए अदालत में एक अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दायर कर चुकी है, जिसमें सुरेश पटेल और उसके सहयोगी महेश नंदा समेत अन्य को आरोपी बनाया गया है। एजेंसी के मुताबिक, मामले में आगे की जांच अभी जारी है।
इनपुट: IANS



