चिटफंड घोटाला: ED ने दो शहरों में मारे छापे, 1 करोड़ कैश ज़ब्त, 182 बैंक खाते फ्रीज़
करोड़ों रुपये के एक चिटफंड घोटाले की जाँच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम और तेलंगाना के हैदराबाद में 5 ठिकानों पर तलाशी अभियान…
करोड़ों रुपये के एक चिटफंड घोटाले की जाँच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम और तेलंगाना के हैदराबाद में 5 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें 1.01 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह छापेमारी वेलफेयर बिल्डिंग्स एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड (WBEPL) और उसके निदेशकों के आवासीय और व्यावसायिक परिसरों पर की गई।
ईडी के भुवनेश्वर ज़ोनल कार्यालय ने 5 अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत यह कार्रवाई की। कंपनी के जिन निदेशकों के यहाँ तलाशी ली गई, उनमें मल्ला विजया प्रसाद और वराह रामकृष्ण सत्य श्रीनिवास राव अल्ला समेत अन्य लोग शामिल हैं। इस मामले में आगे की जाँच अभी जारी है।
तलाशी में क्या-क्या मिला?
छापेमारी के दौरान नकद राशि के अलावा कई चल और अचल संपत्तियों से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज़ और सबूत भी ज़ब्त किए गए। इनमें संपत्ति के कागजात और कई डिजिटल डिवाइस शामिल हैं। इसके अलावा, एजेंसी ने WBEPL और उसके निदेशकों से जुड़े 182 बैंक खातों और छह लग्ज़री गाड़ियों को फ्रीज़ करने का आदेश भी जारी किया है।
कैसे हुआ यह घोटाला?
ईडी ने यह जाँच कई FIR और चार्जशीट के आधार पर शुरू की थी, जो ओडिशा पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा (भुवनेश्वर), CBI और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) द्वारा कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ दायर की गई थीं। जाँच में पता चला है कि कंपनी ने रियल एस्टेट कारोबार की आड़ में बड़े पैमाने पर जमा योजनाएँ चलाईं।
आरोप है कि कंपनी ने कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए जनता से 2,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की भारी रकम जमा की। ये पैसे ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों के हज़ारों निवेशकों से विभिन्न योजनाओं के ज़रिए अवैध रूप से जुटाए गए थे। कंपनी पर आरोप है कि वह नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान करती थी और निवेशकों की रकम को निजी फायदे के लिए इस्तेमाल करती थी। कंपनी ने विशाखापत्तनम में ज़मीन देने का झूठा वादा किया और बाद में कई राज्यों में अपनी शाखाएँ बंद कर निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की।
इनपुट: IANS



