गुजरात: सेमीकंडक्टर हब बनने की राह पर बड़ा कदम, माइक्रोन प्लांट में 12 घंटे की शिफ्ट को मंजूरी
गुजरात सरकार ने राज्य को भारत का सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक अहम फैसला लिया है। साणंद में स्थित माइक्रोन टेक्नोलॉजी के सेमीकंडक्टर प्लांट को 12 घंटे की कार्य शिफ्ट में काम…
गुजरात सरकार ने राज्य को भारत का सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक अहम फैसला लिया है। साणंद में स्थित माइक्रोन टेक्नोलॉजी के सेमीकंडक्टर प्लांट को 12 घंटे की कार्य शिफ्ट में काम करने की अनुमति दे दी गई है। हालांकि, समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों के लिए साप्ताहिक काम के घंटे 48 से अधिक नहीं होंगे, और यह व्यवस्था पूरी तरह से स्वैच्छिक होगी।
यह मंजूरी 'ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (ओएसएच) कोड, 2020' के तहत दी गई है, जो राज्य सरकारों को विशेष परिस्थितियों में उद्योगों को कुछ नियमों से छूट देने का अधिकार देता है। गुजरात सरकार का कहना है कि यह निर्णय राज्य के आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। यह राज्य में अपनी तरह की पहली मंजूरी है।
कामकाज की शर्तें और नियम
राज्य सरकार ने श्रमिकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस मंजूरी के साथ कई कड़ी शर्तें भी लागू की हैं। 12 घंटे की शिफ्ट में केवल वे ही कर्मचारी काम कर सकेंगे जो इसके लिए अपनी लिखित सहमति देंगे। काम के कुल घंटे आराम के अंतराल सहित प्रतिदिन 12 घंटे से अधिक नहीं हो सकते, जबकि साप्ताहिक सीमा 48 घंटे ही रहेगी। बाकी दिनों को सवेतन अवकाश माना जाएगा।
गुजरात के श्रम, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री कुंवरजी बावलिया ने स्पष्ट किया, "किसी भी औद्योगिक इकाई को कर्मचारियों के लिए 12 घंटे की शिफ्ट रखने के लिए सरकार की पूर्वानुमति लेना अनिवार्य है।" उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रावधान का उपयोग राज्य के व्यापक सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर किया गया है। यदि कोई कंपनी शर्तों का उल्लंघन करती है तो उसकी मंजूरी रद्द कर दी जाएगी और कानूनी कार्रवाई होगी।
सेमीकंडक्टर उद्योग की विशेष जरूरतें
सेमीकंडक्टर का उत्पादन सामान्य फैक्ट्रियों से अलग होता है, जहाँ नियंत्रित 'क्लीनरूम' वातावरण में प्रक्रिया 24 घंटे चलती है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, 12 घंटे की शिफ्ट से शिफ्ट बदलने की संख्या घटती है, जिससे क्लीनरूम में आवाजाही कम होती है और अरबों के निवेश वाली मशीनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होता है। यह दुनिया भर की सेमीकंडक्टर इकाइयों में एक स्वीकृत कार्यप्रणाली है।
गुजरात का सेमीकंडक्टर मिशन
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सेमीकंडक्टर क्षेत्र में देश का सबसे आकर्षक निवेश केंद्र बनकर उभरा है। सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए विशेष नीति घोषित करने वाला गुजरात देश का पहला राज्य था। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत मंजूर छह बड़े प्रोजेक्ट गुजरात को मिले हैं, जिनसे लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपए का निवेश और करीब 50,000 रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
माइक्रोन का साणंद प्लांट 5 लाख वर्ग फीट से अधिक के क्लीनरूम क्षेत्र के साथ कंपनी के वैश्विक नेटवर्क में महत्वपूर्ण होगा। यहां 2026 तक करोड़ों चिप्स की असेंबली और टेस्टिंग शुरू होने की उम्मीद है, और 2027 तक उत्पादन क्षमता हर साल करोड़ों चिप्स तक पहुंच सकती है।
इनपुट: IANS



