DUSU चुनाव में हिंसा: दिल्ली हाईकोर्ट की सख़्त कार्रवाई, विजय जुलूस पर रोक और सभी उम्मीदवारों को नोटिस
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसा और नियमों के उल्लंघन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। एक महत्वपूर्ण आदेश में, अदालत ने किसी भी तरह के विजय जुलूस पर…
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसा और नियमों के उल्लंघन पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। एक महत्वपूर्ण आदेश में, अदालत ने किसी भी तरह के विजय जुलूस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही, चुनाव में हिस्सा ले रहे सभी 140 उम्मीदवारों और छात्र संगठनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। अदालत ने पूछा है कि नियमों का बार-बार उल्लंघन करने के लिए उन पर सामूहिक चुनावी हर्जाना क्यों न लगाया जाए। इस मामले में सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को तय की गई है।
हथियारों के प्रदर्शन और गुंडागर्दी पर फटकार
अदालत ने एक तस्वीर पर गहरी नाराज़गी जताई, जिसमें एक छात्र बंदूक लहराता दिख रहा था। कोर्ट ने टिप्पणी की, "ये छात्र कैसे हो सकते हैं। खुलेआम हथियार दिखा रहे हैं। ये वास्तविक छात्रों के मौकों को खा रहे हैं।" अदालत ने बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के काफिले और हथियारों के इस्तेमाल को लेकर भी दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई। कोर्ट ने सवाल किया कि इतनी बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती के बावजूद यह सब कैसे होने दिया गया।
हाईकोर्ट ने कहा, "उम्मीदवार कार की छत और आगे के बोनट पर खड़े हैं। क्या यह गुंडागर्दी नहीं है?" कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह की हरकतों से डर और आतंक का माहौल पैदा होता है।
पुलिस और डीयू प्रशासन की कार्रवाई
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने बताया कि 998 चालान किए गए हैं, 6 एफआईआर दर्ज हुई हैं और 4 गिरफ्तारियां भी हुई हैं। वहीं, डीयू प्रशासन ने बताया कि उन्होंने भी संबंधित छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। हालांकि, कोर्ट ने इस कार्रवाई को नाकाफी माना। अदालत ने पिछले चुनाव की एक घटना का ज़िक्र करते हुए कहा, "एक स्टूडेंट जीतने के बाद टीचर को थप्पड़ मार रहा है, यह कौन सोच सकता है। जीत से आपको विनम्र होना चाहिए।"
लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का उल्लंघन
अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव के दौरान लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है, जिसे हर हाल में रोकना होगा। कोर्ट ने कहा कि छात्रों और छात्र संगठनों द्वारा किए जा रहे उल्लंघन को देखते हुए, वह उन पर सामूहिक चुनावी हर्जाना लगाने का प्रस्ताव कर रही है। अदालत ने चेतावनी दी कि लोकतंत्र को "आपराधिक समाज में नहीं बदला जा सकता।"
इनपुट: IANS



