नीट और प्रदर्शनों पर सरकार घिरी, ओवैसी बोले- छात्रों के बर्बाद भविष्य का क्या होगा?
नीट परीक्षा में पेपर लीक विवाद और सेंट्रल जॉब्स फॉर पीपल (सीजेपी) के विरोध-प्रदर्शनों पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी समेत कई विपक्षी नेताओं ने सरकार की मंशा और…
नीट परीक्षा में पेपर लीक विवाद और सेंट्रल जॉब्स फॉर पीपल (सीजेपी) के विरोध-प्रदर्शनों पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी समेत कई विपक्षी नेताओं ने सरकार की मंशा और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ओवैसी ने पूछा कि दोषियों पर कार्रवाई करना तो ठीक है, लेकिन उन छात्रों के नुकसान की भरपाई कैसे होगी जिनका भविष्य इस विवाद की भेंट चढ़ गया।
ओवैसी ने सरकार से सीधे सवाल किया, “उन छात्रों का क्या जिनकी मौत हो गई? उन छात्रों का क्या जिन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ी लेकिन वे वैसी रैंक हासिल नहीं कर पाए? उनका समय तो बर्बाद हो ही चुका है। आप उनके लिए क्या करेंगे?” उन्होंने जोर देकर कहा कि सिर्फ दोषियों को सजा देना काफी नहीं है, बल्कि प्रभावित छात्रों के हितों का भी ध्यान रखना होगा।
प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष एकजुट
विपक्षी दलों ने सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सरकार पर हमला बोला है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के बजाय सख्त रवैया अपनाया। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को “कुप्रबंधन” बताया और कहा कि घटनास्थल के दृश्य बताते हैं कि प्रदर्शनकारियों से कैसा बर्ताव हुआ। ओवैसी ने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने संसद परिसर में प्रदर्शन कर रहे सांसद चंद्रशेखर से मुलाकात की है।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पर व्यापक चर्चा की जरूरत बताई। उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, “सिविल ड्रेस में मौजूद लोगों द्वारा लाठीचार्ज किया जाना गंभीर मामला है और संसद में इस मुद्दे को उठाना जरूरी है।”
संवाद की कमी और विपक्ष की अनदेखी का आरोप
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि अगर सरकार ने शुरुआत में ही प्रदर्शनकारियों से बात की होती तो विवाद को टाला जा सकता था। उन्होंने आशंका जताई कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बदनाम करने के लिए कुछ लोगों की घुसपैठ कराई गई हो सकती है। वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने दावा किया कि सांसद होने की जानकारी देने के बावजूद उनके साथ मारपीट की गई और महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार हुआ।
विपक्षी नेताओं ने संसद में अपनी आवाज दबाने का भी आरोप लगाया। झामुमो सांसद महुआ माजी ने कहा कि विपक्ष संसद को चलाना चाहता है ताकि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर बहस हो सके। कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि विपक्ष को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और संसद में मुद्दे उठाने के उनके अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।
इनपुट: IANS



