दिशा सालियान मौत मामला: 4 साल बाद पिता की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब CBI करेगी जांच
सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के चार साल से भी ज़्यादा समय बाद, बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है। अदालत ने यह फैसला दिशा…
सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के चार साल से भी ज़्यादा समय बाद, बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है। अदालत ने यह फैसला दिशा के पिता सतीश सालियान की याचिका पर सुनाया, जिन्होंने अपनी बेटी की मौत की नए सिरे से जांच की मांग की थी।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, हाईकोर्ट ने सीबीआई को इस मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू करने और दिशा के पिता का बयान दर्ज करने का निर्देश दिया है। जून 2020 में हुई इस घटना की जांच अब एक वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में होगी। इससे पहले हुई जांच से जुड़े सभी रिकॉर्ड भी सीबीआई को सौंपे जाएंगे ताकि एजेंसी शुरू से मामले की पड़ताल कर सके।
पिता का लंबा इंतज़ार और न्याय की उम्मीद
अपनी बेटी की मौत की जांच से असंतुष्ट पिता सतीश सालियान ने अदालत में गुहार लगाई थी कि मामले की ठीक से जांच नहीं हुई और कुछ प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की गई। फैसले के बाद उन्होंने मीडिया से कहा, "इस फैसले का मुझे 6 साल से इंतजार था। मैं अपनी बेटी को खो चुका हूं। मुझे विश्वास है सीबीआई गहराई से इस मामले में जांच करेगी।" उन्होंने इस आदेश के लिए कोर्ट के जज का शुक्रिया भी अदा किया।
क्या था पूरा मामला?
28 वर्षीय सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने से हुई थी। इसके कुछ ही दिन बाद, 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत भी अपने घर में मृत पाए गए थे। दिशा कुछ समय तक सुशांत की मैनेजर भी रही थीं, जिसके चलते दोनों घटनाओं को लेकर कई तरह के सवाल उठे थे। शुरुआत में मुंबई पुलिस ने इसे एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) के तौर पर दर्ज किया था और बाद में जांच में इसे आत्महत्या बताया था। पुलिस का कहना था कि उन्हें किसी आपराधिक साजिश या यौन हमले के सबूत नहीं मिले थे।
अदालत का स्पष्ट निर्देश
याचिकाकर्ता के वकील नीलेश ओझा ने बताया कि अदालत ने जांच को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, "कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जिसके भी खिलाफ सबूत मिले, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, बिना सबूत के किसी भी व्यक्ति को आरोपी नहीं बनाया जाना चाहिए।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि सीबीआई क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करती है, तो उन्हें विरोध याचिका दायर करने का अधिकार होगा।
इनपुट: IANS



