मास्टर प्लान 2047: वर्टिकल विकास, रिवर फ्रंट और इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट से बदलेगी दिल्ली की तस्वीर
दिल्ली के भविष्य का खाका माने जा रहे मास्टर प्लान 2047 को सरकार ने सिर्फ एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि विकसित भारत की राजधानी बनाने का रोडमैप बताया है। दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद के मुताबिक, यह योजना…
दिल्ली के भविष्य का खाका माने जा रहे मास्टर प्लान 2047 को सरकार ने सिर्फ एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि विकसित भारत की राजधानी बनाने का रोडमैप बताया है। दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद के मुताबिक, यह योजना सीमित ज़मीन की चुनौती से निपटने के लिए शहर के वर्टिकल यानी ऊर्ध्वाधर विकास की राह खोलेगी। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में उन्होंने इस योजना के विभिन्न पहलुओं, जैसे यमुना की सफाई और प्रदूषण की समस्या पर विस्तार से जानकारी दी।
मंत्री आशीष सूद ने कहा, "दिल्ली मास्टर प्लान 2047 से यह साफ हो गया है कि भले ही दिल्ली में जमीन सीमित है, लेकिन शहर का विजन सीमित नहीं रहेगा। दिल्ली अब ऊपर की ओर (वर्टिकली) बढ़ेगी। इसमें रिवर कनेक्टर्स, अरावली में ग्रीन स्पेस, पार्क कनेक्टर्स और साइकिलिंग ट्रैक होंगे। अगर इसकी मुख्य विशेषताओं को देखें, तो मास्टर प्लान ने दिल्ली को एक विकसित राज्य बनाने का रास्ता खोल दिया है।"
पुनर्विकास और किफायती आवास
इस योजना में पुराने और छोटे पड़ चुके डीडीए फ्लैट्स के पुनर्विकास पर खास ध्यान दिया गया है। योजनाबद्ध क्षेत्रों में 3,000 वर्ग मीटर के दायरे में बने फ्लैट्स के लिए 1.5 का फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) दिया गया है, जिससे लोगों को बड़े घर मिल सकेंगे। इसी तरह, अनधिकृत कॉलोनियों में भी 2,000 वर्ग मीटर के इलाकों का सामूहिक विकास किया जाएगा। सूद के अनुसार, ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) के तहत मेट्रो लाइनों के 500 मीटर के दायरे में किफायती घर बनाए जाएंगे, ताकि लोग सार्वजनिक परिवहन का आसानी से इस्तेमाल कर सकें, जिससे प्रदूषण और ट्रैफिक की समस्या कम होगी।
ट्रांसपोर्ट और ग्रीन स्पेस का एकीकरण
मास्टर प्लान में पहली बार 'कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान' को शामिल किया गया है, जो भूमि उपयोग को ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जोड़ता है। इसका लक्ष्य मेट्रो, सड़कों और अन्य परिवहन प्रणालियों को एकीकृत करना है। इसके अलावा, दिल्ली को यमुना से जोड़ने के लिए रिवर फ्रंट और कनेक्टर्स विकसित किए जाएंगे। योजना में अरावली क्षेत्र में ग्रीन स्पेस के साथ-साथ 50 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक और 200 किलोमीटर से ज़्यादा के 'पार्क कनेक्टर्स' बनाने का भी प्रस्ताव है। मंत्री ने बताया कि साहिबी नदी के आसपास के खाली इलाकों को भी पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है।
यमुना की सफाई का संकल्प
यमुना की सफाई के मुद्दे पर आशीष सूद ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में यमुना में गिरने वाले नालों पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने का काम पहले से ही चल रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में इस परियोजना को आगे बढ़ा रही है।
इनपुट: IANS



