DHFL लोन घोटाला: ED ने लंदन की प्रॉपर्टी से जुड़े मामले में फ्रीज किए ₹52 करोड़
देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक, दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DHFL) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच…
देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में से एक, दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DHFL) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत करीब 51.75 करोड़ रुपए की रकम फ्रीज कर दी है। यह कार्रवाई लंदन स्थित एक संपत्ति की बिक्री से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में की गई।
ईडी की यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज की गई FIR पर आधारित है। यह FIR 17 बैंकों के एक समूह की ओर से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने दर्ज कराई थी। बैंकों के इस समूह ने मिलकर डीएचएफएल को कुल 42,871.42 करोड़ रुपए का कर्ज दिया था।
कैसे दिया गया धोखाधड़ी को अंजाम?
जांच एजेंसी के अनुसार, डीएचएफएल के प्रमोटरों कपिल वाधवान और धीरज वाधवान ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर बैंकों को धोखा देने की साजिश रची। आरोप है कि कंपनी ने अपने खातों में हेरफेर किया और कर्ज के पैसे को गलत तरीके से दूसरी जगहों पर भेजकर उसका दुरुपयोग किया। इस पूरी धोखाधड़ी से बैंकों को करीब 34,615 करोड़ रुपए का भारी नुकसान हुआ।
ब्रिटेन की संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग का कनेक्शन
ईडी की जांच में पता चला है कि घोटाले की रकम को विदेश में ठिकाने लगाने के लिए एक जटिल तरीका अपनाया गया। जांच के केंद्र में हर्टमोर हाउस नामक एक संपत्ति है, जो यूनाइटेड किंगडम (UK) में स्थित थी और कपिल वाधवान की पत्नी वनीता वाधवान के नाम पर थी।
जांच के मुताबिक, वनीता वाधवान और अल जालोर ट्रेडिंग FZE नामक एक कंपनी के बीच एक फर्जी कर्ज का समझौता दिखाया गया। इस समझौते के आधार पर ब्रिटेन की संपत्ति को गिरवी रख दिया गया। ईडी का मानना है कि यह सब डीएचएफएल घोटाले से जुड़ी भारत की देनदारियों को चुकाने के लिए विदेशी संपत्ति का इस्तेमाल करने की एक सोची-समझी साजिश थी।
बिक्री की रकम भारत कैसे लाई गई?
एजेंसी ने बताया कि साल 2026 में इस संपत्ति को बेच दिया गया। हालांकि, बिक्री से मिली रकम संपत्ति की असली मालिक वनीता वाधवान को नहीं मिली। इसके बजाय, पैसा अल जालोर ट्रेडिंग FZE के भारत स्थित बैंक खाते में भेज दिया गया।
ईडी ने 19 अगस्त को इसी मामले में तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान अल जालोर ट्रेडिंग के बैंक खाते में 5.41 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 51.75 करोड़ रुपए) मिले। एजेंसी ने इसे अपराध की कमाई मानते हुए फ्रीज कर दिया। तलाशी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और सबूत भी जब्त किए गए हैं, जिनसे जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। ईडी ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है।
इनपुट: IANS



