पराली अब समस्या नहीं, संपत्ति: इथेनॉल और बायो-CNG में बदलने से खत्म होगी जलाने की मजबूरी - नितिन गडकरी
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि देश में पराली जलाने की समस्या अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है। उन्होंने बताया कि पराली को अब इथेनॉल और बायो-सीएनजी जैसे उपयोगी उत्पादों में बदला जा रहा है, जिससे…
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि देश में पराली जलाने की समस्या अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है। उन्होंने बताया कि पराली को अब इथेनॉल और बायो-सीएनजी जैसे उपयोगी उत्पादों में बदला जा रहा है, जिससे आने वाले समय में यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गडकरी ने यह बात दिल्ली विधानसभा के पहले स्पीकर चार्टी लाल गोयल की 99वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही।
अपने संबोधन में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण की चुनौतियों पर जोर दिया। गडकरी ने कहा कि वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण मानव समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं, जो लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं और जीवन प्रत्याशा भी घटा रहे हैं।
दिल्ली का प्रदूषण और पराली का समाधान
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हालांकि शहर लंबे समय से गंभीर प्रदूषण से जूझ रहा है, लेकिन अब हालात बदलने लगे हैं। उन्होंने पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को दिल्ली के प्रदूषण का एक बड़ा कारण बताया। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार की ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (कचरे से संपत्ति) की अवधारणा पर आधारित नीतियों को श्रेय देते हुए गडकरी ने कहा कि अब पराली को कचरा नहीं, बल्कि एक उपयोगी संसाधन माना जा रहा है।
उन्होंने विस्तार से बताया कि पराली का उपयोग अब गैस बनाने के साथ-साथ सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) तैयार करने में भी किया जा रहा है। उनके अनुसार, कृषि अवशेषों को आर्थिक संसाधन में बदलने की यह पहल न केवल पर्यावरण की रक्षा करती है, बल्कि किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकती है।
समाज और पर्यावरण के प्रति कर्तव्य
कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने इस बात पर भी जोर दिया कि पारिस्थितिकी और पर्यावरण की रक्षा करना हर व्यक्ति का पहला कर्तव्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे पिछले कुछ वर्षों से इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं। इस अवसर पर उन्होंने एक ऐसे स्थान की भी प्रशंसा की, जहाँ पहले कबाड़ का ढेर था और अब उसे एक सुंदर बगीचे में बदल दिया गया है, इसे उन्होंने समाज और पर्यावरण के लिए एक सकारात्मक बदलाव का उदाहरण बताया।
चार्टी लाल गोयल को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा, “व्यक्ति कितने वर्षों तक जीवित रहा, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उसने अपना जीवन किस तरह जिया और समाज के लिए क्या योगदान दिया। जन्म लेने वाले हर व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है और यह एक सार्वभौमिक नियम है।”
इनपुट: IANS



