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नोटबंदी : कालेधन का सफाया या काली कमाई को सफेद करने की तरकीब

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नोटबंदी : कालेधन का सफाया या काली कमाई को साफ करने की तरकीब

8 नवंबर 2016 तकरीबन आठ बजे देश के प्रधानमंत्री ने विभिन्न राष्ट्रीय चैनलों के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित कर नोटबंदी का एलान किया। अपने संबोधन में उन्होंने जनता को नोटबंदी के मुख्यत: तीन चार कारण बताए, कालेधन का सफाया होगा, जिससे देश की गरीब जनता को लाभ मिलेगा। आतंकवादियों और नक्सलवादियों की कमर टूट जाएगी, जिससे देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा मजबूत होगी। भष्ट्राचार और भ्रष्टाचारियों का विनाश होगा, जिससे सरकारी काम में पारदर्शिता आएगी और ग़रीबों की परेशानी कम होगी।

गरीब जनता ने खुलकर पीएम के इस पहल का समर्थन किया और उसके कारण तमाम दिक्कतें भी झेलीं। लेकिन परिणाम सबके सामने है। आज उसकी नोटबंदी की बरसी है जिसने तथाकथित रूप अर्थव्यवस्था की कमर ही नहीं तोड़ी बल्कि जिन गरीब लोगों को लाभ का आश्वासन दिया गया था कहते हैं उन्हें ही सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है।

नोटबंदी के लिए ये बताए गए थे कारण

भ्रष्टाचार, काले धन, आतंकवाद, जाली नोट और आतंकवादियों को वित्तीय सहयोग जैसी समस्याओं से निपटने के लिए 500 और 1,000 रुपए के नोट बंद करने का कारण बताया गया था। साथ ही इससे देश की जनता, कारोबारियों, किसानों और मजदूरों को फायदा पहुंचाने के प्रमुख रूप से ये भी कारण बताए गए थे।

काले धन पर लगाम

8 नवंबर को जब पीएम मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया तो इसे सबसे अधिक कालेधन पर लगाम कसने वाले कदम के रूप में पेश किया गया था। कहा गया कि ब्लैक मनी पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी। इसके बाद 15 अगस्त, 2017 को दिए भाषण में उन्होंने ने एक गैर सरकारी रिसर्च का हवाला देते हुए कहा था कि 3 लाख करोड़ रुपया, जो कभी बैंकिंग सिस्टम में नहीं आता था, वह आया है। मगर आरबीआई की रिपोर्ट कहती है कि नोटबंदी के बाद चलन से बाहर किए गए 500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों में से लगभग 99 फ़ीसदी बैंकिंग सिस्टम में वापस लौट आए हैं। विपक्ष सवाल उठा रहा है कि अगर ऐसा है तो काला धन कहां है? इसे लेकर पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि अगर 99 फ़ीसदी नोट क़ानूनी रूप से बदले गए तो नोटबंदी का फ़ैसला क्या काले धन को सफेद करने के लिए तैयार किया गया था।

नकली नोटों का चलन रुकेगा

नोटबंदी के फ़ायदे गिनाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि इससे जाली नोटों को ख़त्म करने में मदद मिलेगी। रिजर्व बैंक को इस वित्तीय वर्ष (2017) में 762,072 फर्ज़ी नोट मिले, जिनकी क़ीमत 43 करोड़ रुपए थी। इसके पिछले वित्तीय वर्ष (2016) को 632,926 नकली नोट पाए गए थे। यह अंतर बहुत ज़्यादा नहीं है।

भ्रष्टाचार पर लगाम

भ्रष्टाचार पर लगाम भी नोटबंदी की प्रमुख कवायद के तौर पर पेश किया गया था, लेकिन ऐसा होता लग नहीं रहा है। प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का ऐलान करते वक्त इसे भ्रष्टाचार, काले धन और जाली नोटों के खिलाफ जंग बताया था। आरबीआई की रिपोर्ट के बाद सरकार के इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं। नोटबंदी से पहले 15.44 लाख करोड़ की कीमत के 1000 और 500 के नोट प्रचलन में थे। इनमें से कुल 15.28 लाख करोड़ रुपए की कीमत के नोट बैंकों में वापस आ गए। साल 2016-17 के दौरान 632.6 करोड़ 1000 रुपए के नोट प्रचलन में थे, जिनमें से 8.9 करोड़ नोट सिस्टम में लौटे।

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आतंकवाद और नक्सलवाद पर प्रहार

पीएम मोदी नोटबंदी को लेकर जब इसके फायदे गिनाए थे तब यह भी कहा था कि इससे आतंकवाद और नक्सलवाद की कमर टूट जाएगी। उनका कहा था कि आतंकवाद और नक्सलवाद दोनों असल में नकली नोटों और काले धन से मदद मिलती है। मगर हकीक़त में ऐसा देखने को नहीं मिल रहा। देश में नोटबंदी के बाद पकड़े गए नकली नोटों की संख्या पिछले साल से कुछ ही ज़्यादा है, इसलिए पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि नोटबंदी से आतंकवाद और नक्सलवाद कम हुआ है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने बताया है कि वित्त वर्ष 2016-17 में कुल 7,62,072 जाली नोट पकड़े गए, जो वित्त वर्ष 2015-16 में पकड़े गए 6.32 जाली नोटों की तुलना में 20.4 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष में नोटबंदी के बाद 500 रुपये और 1000 रुपये के जाली नोट तुलनात्मक रूप से अधिक संख्या में पकड़े गए। अब नोटबंदी के बाद पकड़े गए नकली नोटों की संख्या पिछले साल से कुछ ही ज़्यादा है, इसलिए यह पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता कि नोटबंदी का असर आतंकवाद और नक्सलवाद पर पड़ा है। हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि कश्मीर में ‘पत्थरबाज़ बेअसर हुए हैं.’

कारोबारियों, किसानों और मजदूरों को मिलेगा लाभ

दिसंबर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी को ‘यज्ञ’ क़रार देते हुए कहा था कि इस फ़ैसले से किसानों, व्यापारियों और श्रमिकों को फ़ायदा होगा। मगर व्यापारियों, किसानों और श्रमिकों का बड़ा वर्ग इस क़दम की आलोचना करता रहा है।

विपक्ष ही नहीं, आरएसएस से जुड़े भारतीय मज़दूर संघ और भारतीय किसान संघ ने भी नोटबंदी पर सवाल उठाए हैं। भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष साजी नारायणन ने कहा “देश की 25 प्रतिशत आर्थिक गतिविधि पर नोटबंदी का बुरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि सबसे ज़्यादा असर असंगठित सेक्टर पर इसका असर हुआ है। भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन, छोटे उद्योग और कृषि क्षेत्र में दिहाड़ी मज़दूरों पर नोटबंदी का सबसे बुरा असर पड़ा है। भारतीय किसान संघ के सचिव मोहिनी मोहन मिश्रा ने कहा कि नोटबंदी का सबसे बुरा असर कृषि क्षेत्र के मजदूरों पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि किसानों पर भी इसका व्यापक असर पड़ा है।”

99 प्रतिशत बैन किए गए नोटों की वापसी : रिजर्व बैंक

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में यह बताया गया कि नोटबंदी के दौरान कुल 99 प्रतिशत बैन किए गए नोट बैंकों में जमा हो गए। इसका मतलब हुआ कि सिर्फ 1.4 प्रतिशत हिस्से को छोड़कर बाकी सभी 1000 रुपए के नोट सिस्टम में लौट चुके हैं। यानी कि, सिर्फ 8.9 करोड़ नोट ही ऐसे रहे जो सिस्टम में नहीं लौटे। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सब धन आ ही गए तो कालाधन बचा कहां ?

 

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