मैनपुरी गैंगरेप के खिलाफ आधी रात दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्राओं का मार्च, सुरक्षा और अधिकारों की मांग
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में एक नाबालिग लड़की के साथ चलती स्लीपर बस में हुए कथित गैंगरेप की घटना ने दिल्ली में भी आक्रोश पैदा कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस भयावह घटना के विरोध में…
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में एक नाबालिग लड़की के साथ चलती स्लीपर बस में हुए कथित गैंगरेप की घटना ने दिल्ली में भी आक्रोश पैदा कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस भयावह घटना के विरोध में दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की सैकड़ों छात्राओं ने आधी रात को सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा जाहिर किया। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के बैनर तले आयोजित इस 'रीक्लेम द नाइट' मार्च का उद्देश्य यह संदेश देना था कि महिलाओं को किसी भी समय सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित और स्वतंत्र रूप से रहने का अधिकार है।
यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनावों की चर्चा के बीच हुआ, जिसने इसे और भी प्रासंगिक बना दिया। मार्च में शामिल DU के विभिन्न कॉलेजों की छात्राओं ने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और प्रतिनिधित्व को एक केंद्रीय चुनावी मुद्दा बनाने पर जोर दिया।
DUSU चुनावों के लिए 'छात्रा घोषणापत्र' जारी
इस अवसर पर SFI ने DUSU चुनावों के लिए विशेष रूप से छात्राओं पर केंद्रित एक 'छात्रा घोषणापत्र' भी जारी किया। इस घोषणापत्र में कई अहम मांगें शामिल की गई हैं, जिनका लक्ष्य विश्वविद्यालय परिसर को छात्राओं के लिए अधिक सुरक्षित और समावेशी बनाना है।
घोषणापत्र की मुख्य मांगें:
- DUSU पदाधिकारी पदों पर महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण।
- सभी महिला कॉलेजों को DUSU चुनावों में वोटिंग का अधिकार।
- भेदभावपूर्ण कर्फ्यू के बिना सुरक्षित और किफायती महिला हॉस्टल की व्यवस्था।
- छात्राओं के प्रतिनिधित्व वाली एक सक्रिय आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन।
- कैंपस में मासिक धर्म स्वच्छता सुविधाओं की आसान उपलब्धता।
- कैंपस के आसपास महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती और मजबूत आपातकालीन सहायता प्रणाली।
- नैतिक पुलिसिंग (Moral Policing) और लिंग-आधारित उत्पीड़न का अंत।
घोषणापत्र में छात्राओं की पढ़ाई बीच में छूटने (ड्रॉपआउट) से रोकने के उपायों, स्कॉलरशिप तक बेहतर पहुंच, लिंग-न्यायपूर्ण पाठ्यक्रम और DU कैंपस में नियमित स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट कराने की भी मांग की गई है। SFI का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा उनकी आजादी की कीमत पर नहीं होनी चाहिए और सरकार व विश्वविद्यालय को ऐसा माहौल बनाना चाहिए जहां महिलाएं बिना डर के पढ़ सकें और यात्रा कर सकें।
इनपुट: IANS



