दिल्ली की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026 लागू, 2030 तक प्रदूषण मुक्त परिवहन का लक्ष्य
दिल्ली को एक स्वच्छ, आधुनिक और हरित परिवहन व्यवस्था देने के लक्ष्य के साथ, दिल्ली सरकार ने अपनी नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति, 2026 अधिसूचित कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह नीति 1 जुलाई, 2026 से
दिल्ली को एक स्वच्छ, आधुनिक और हरित परिवहन व्यवस्था देने के लक्ष्य के साथ, दिल्ली सरकार ने अपनी नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति, 2026 अधिसूचित कर दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह नीति 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी हो गई है और 31 मार्च, 2030 तक लागू रहेगी। इस नीति का मुख्य उद्देश्य दिल्ली में ई-वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर वायु गुणवत्ता सुधारना और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करना है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि यह नीति केवल वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक रोडमैप है। इसके तहत चार्जिंग नेटवर्क, बैटरी स्वैपिंग, बैटरी रीसाइक्लिंग, ऊर्जा प्रबंधन, डिजिटल सेवा और पर्यावरण संरक्षण को एकीकृत कर एक दीर्घकालिक स्वच्छ परिवहन व्यवस्था स्थापित करने की योजना है।
प्रदूषण नियंत्रण पर विशेष ध्यान क्यों?
इस नीति में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की उस रिपोर्ट को आधार बनाया गया है, जिसमें बताया गया है कि दिल्ली के वायु प्रदूषण में वाहनों का योगदान लगभग 23% है, जो सर्दियों में सबसे बड़ा स्रोत होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी के कुल वाहनों में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी करीब 67% है। इसलिए, प्रदूषण कम करने के लिए इनके विद्युतीकरण को बेहद ज़रूरी माना गया है। नीति में दोपहिया वाहनों के अलावा तिपहिया, कमर्शियल कारों और मालवाहक वाहनों के विद्युतीकरण को प्राथमिकता दी गई है, क्योंकि ये रोज़ाना ज़्यादा दूरी तय करते हैं।
नीति के कार्यान्वयन की क्या है रूपरेखा?
इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक मजबूत संस्थागत ढाँचा तैयार किया गया है। परिवहन विभाग को इसका नोडल विभाग बनाया गया है, जिसके तहत एक समर्पित ईवी सेल स्थापित होगा। यह सेल नीति के संचालन और समन्वय का काम देखेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, मॉडलों को सब्सिडी के लिए मंजूरी देने हेतु एक मॉडल अनुमोदन समिति भी बनेगी। दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल) को चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है। डीटीएल एक सिंगल-विंडो सिस्टम के जरिए चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना को आसान बनाएगा।
निगरानी और अन्य विभागों की भूमिका
नीति की उच्च-स्तरीय निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार समिति का गठन किया जाएगा। इसके अलावा, एक दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन शीर्ष समिति भी होगी जो नीति से जुड़े अहम फैसले लेगी और भविष्य की स्वच्छ ईंधन प्रौद्योगिकियों पर सरकार को सुझाव देगी। नीति में बैटरी रीसाइक्लिंग पर भी जोर दिया गया है। पर्यावरण विभाग और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) यह सुनिश्चित करेंगे कि बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का सख्ती से पालन हो। साथ ही, शिक्षा विभाग को स्कूल बसों का चरणबद्ध विद्युतीकरण करने और छात्रों के बीच पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता अभियान चलाने की ज़िम्मेदारी दी गई है।
इनपुट: IANS



