दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में 'बेडशीट घोटाला'? 200% कमीशन और ज़रूरत से 100 गुना ज़्यादा खरीद का आरोप
आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली सरकार पर सरकारी अस्पतालों के लिए की गई खरीद में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि बेडशीट खरीदने में 200 प्रतिशत तक कमीशन लिया गया और ज़रूरत से कई गु
आम आदमी पार्टी (आप) ने दिल्ली सरकार पर सरकारी अस्पतालों के लिए की गई खरीद में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि बेडशीट खरीदने में 200 प्रतिशत तक कमीशन लिया गया और ज़रूरत से कई गुना ज़्यादा मात्रा में खरीदकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'आप' के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इसे ₹650 करोड़ के कथित दवा घोटाले का हिस्सा बताया है।
सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि जिस कंपनी ने एम्स (AIIMS) को एक बेडशीट ₹150 में दी, दिल्ली सरकार ने उसी कंपनी से वही बेडशीट ₹450 प्रति पीस के भाव पर खरीदी। उन्होंने इसे सीधे तौर पर प्रति बेडशीट ₹300 या 200 प्रतिशत की कमीशनखोरी करार दिया।
अ ज़रूरत से ज़्यादा खरीद और ₹50 करोड़ की 'लूट'
आरोपों के मुताबिक, दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में कुल बेड की संख्या लगभग 15,500 है, लेकिन सरकार ने ₹75 करोड़ खर्च करके करीब 16.60 लाख बेडशीट खरीद लीं। 'आप' नेता के अनुसार, इसका मतलब है कि हर एक बेड के लिए औसतन 106 बेडशीट खरीदी गईं। सौरभ भारद्वाज ने इसे सरकारी धन का दुरुपयोग बताते हुए इस प्रक्रिया में करीब ₹50 करोड़ की लूट का आरोप लगाया है।
टेंडर प्रक्रिया और केंद्रीय खरीद पर सवाल
पार्टी ने खरीद प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि पहले अस्पतालों को अपनी ज़रूरत के हिसाब से सामान खरीदने की छूट थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने एक केंद्रीय खरीद एजेंसी (Central Procurement Agency) के माध्यम से सारी खरीद अनिवार्य कर दी। उन्होंने दावा किया कि इसी व्यवस्था का लाभ उठाकर मनमाने दामों पर खरीदारी की गई। 'आप' नेता ने यह भी आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा को खत्म करने के लिए एक ही परिवार से जुड़ी तीन कंपनियों को योग्य बनाया गया और अंत में उनमें से एक को खरीद का आदेश दे दिया गया।
आउटसोर्स लैब सेवाएं भी ठप
बेडशीट खरीद के अलावा, सौरभ भारद्वाज ने आउटसोर्स लैब सेवाओं के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार ने 28 सरकारी अस्पतालों, 203 डिस्पेंसरी और 370 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आउटसोर्स लैब सेवाओं को अचानक बंद कर दिया है। उनके मुताबिक, जिला स्तर के अधिकारियों और डॉक्टरों ने 2025 में जारी हुए टेंडर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद सरकार को यह कदम उठाना पड़ा। 'आप' ने स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इनपुट: IANS



