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रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का बड़ा कदम: जबलपुर में अब हर साल 80 अतिरिक्त T-72 और T-90 टैंक होंगे अपग्रेड

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को जबलपुर में टैंकों के नवीनीकरण (नवीनीकरण) की एक महत्वपूर्ण परियोजना का शिलान्यास किया, जो भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में एक अहम मील का…

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का बड़ा कदम: जबलपुर में अब हर साल 80 अतिरिक्त T-72 और T-90 टैंक होंगे अपग्रेड
(फोटो: IANS)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को जबलपुर में टैंकों के नवीनीकरण (नवीनीकरण) की एक महत्वपूर्ण परियोजना का शिलान्यास किया, जो भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर है। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय सेना को दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में से एक बताते हुए कहा कि जमीनी युद्ध में T-72 और T-90 टैंक "सीमाओं पर लोहे की दीवार बनकर खड़े हैं"। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस नई परियोजना के पूरा होने पर जबलपुर में हर साल 80 टैंकों के नवीनीकरण की अतिरिक्त क्षमता स्थापित हो जाएगी।

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यह परियोजना, जिसकी कुल लागत 472 करोड़ रुपए है, देश की टैंक नवीनीकरण क्षमता को काफी बढ़ावा देगी। वर्तमान में भारी वाहन कारखाना (HVF), अवाडी हर साल 150 टैंकों का नवीनीकरण करता है। जबलपुर की नई 80-टैंक क्षमता जुड़ जाने के बाद देश की कुल वार्षिक नवीनीकरण क्षमता बढ़कर 230 टैंक हो जाएगी। इससे सेना को अपनी जरूरतों के अनुसार समय पर उन्नत टैंक मिल सकेंगे।

रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड उछाल

राजनाथ सिंह ने पिछले एक दशक में रक्षा क्षेत्र में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 2014 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन मात्र 46,000 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर रिकॉर्ड 1 लाख 77 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। इसी तरह, रक्षा निर्यात में भी अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। 2014 में जहां भारत 1,000 करोड़ रुपए से भी कम के हथियार बेच पाता था, वहीं आज यह आंकड़ा रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। रक्षा मंत्री ने कहा, "आज दुनिया भारत को देखने का नजरिया बदल रही है और इसके पीछे आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारे प्रयास जिम्मेदार हैं।"

युद्ध में टैंकों की बदलती भूमिका

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली जैसे नए आयाम जुड़ गए हैं, लेकिन जमीनी लड़ाई में टैंकों की भूमिका समाप्त नहीं हुई है, बल्कि विकसित हो रही है। उन्होंने कहा, "हमें यह तय नहीं करना है कि टैंक चाहिए या ड्रोन; हमें यह सुनिश्चित करना है कि हमारे सैनिकों के पास टैंक भी हों, ड्रोन भी हों और दोनों के बीच बेहतर समन्वय भी हो।" उन्होंने भारतीय सेना को लगभग 4,400 टैंकों की आपूर्ति के लिए भारी वाहन कारखाने के 40 वर्षों के योगदान की भी सराहना की।

स्थानीय विकास और रोजगार

राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि यह परियोजना न केवल सैनिकों के लिए वरदान साबित होगी, बल्कि जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए समृद्धि और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। उन्होंने मध्यप्रदेश को अगला प्रमुख रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में राज्य के प्रयासों का भी उल्लेख किया, जिसमें ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में 3,073 हेक्टेयर भूमि पर 16,960 करोड़ रुपए से अधिक का प्रस्तावित निवेश शामिल है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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