210 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी: चंद्रा प्रोटेको के निदेशकों पर CBI का शिकंजा, प्रयागराज में छापेमारी
इंडियन बैंक के नेतृत्व वाले छह बैंकों के एक समूह (कंसोर्टियम) से करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी के आरोप में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने चंद्रा प्रोटेको लिमिटेड (CPL) और उसके निदेशकों के खिलाफ मामला दर्ज…
इंडियन बैंक के नेतृत्व वाले छह बैंकों के एक समूह (कंसोर्टियम) से करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी के आरोप में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने चंद्रा प्रोटेको लिमिटेड (CPL) और उसके निदेशकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एजेंसी ने इस सिलसिले में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कंपनी से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी भी ली है।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई इंडियन बैंक की मुंबई स्थित स्ट्रेस्ड एसेट मैनेजमेंट शाखा की शिकायत के बाद की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कंपनी और उसके निदेशकों ने एक आपराधिक साजिश के तहत कंसोर्टियम बैंकों से कुल 541.46 करोड़ रुपए की विभिन्न ऋण सुविधाएं हासिल की थीं।
क्या हैं धोखाधड़ी के आरोप?
CBI का आरोप है कि कंपनी ने कैश क्रेडिट, टर्म लोन और लेटर ऑफ क्रेडिट जैसी बैंकिंग सुविधाएं लेने के बाद बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां कीं। जांच एजेंसी के मुताबिक, कंपनी ने कंसोर्टियम में शामिल बैंकों को बताए बिना गुप्त रूप से दूसरे बैंकों में खाते चलाए। इसके अलावा, संबद्ध कंपनियों और समान निदेशकों वाली अन्य इकाइयों के माध्यम से लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) का दुरुपयोग किया गया। यह भी आरोप है कि बैंक से जिस काम के लिए पैसा लिया गया था, उसका इस्तेमाल उस काम में नहीं किया गया।
बैंकों को कितना नुकसान हुआ?
जांच एजेंसी ने बताया कि चंद्रा प्रोटेको लिमिटेड ने संबंधित कंपनियों के जरिए बैंक से मिले फंड को दूसरी जगहों पर भेजा और उसका गबन कर लिया। इस पूरी प्रक्रिया में शिकायतकर्ता इंडियन बैंक समेत कंसोर्टियम के पांच बैंकों को कुल मिलाकर लगभग 210.13 करोड़ रुपए का चूना लगा। इस मामले में CPL के निदेशकों रणजीत गुप्ता, अनिलेश गुप्ता और अपर्णा गुप्ता के साथ-साथ अज्ञात लोक सेवकों व अन्य को भी आरोपी बनाया गया है।
मामला दर्ज करने के बाद, CBI ने प्रयागराज में निदेशकों से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान जांच एजेंसी ने संबंधित अवधि के लेजर रिकॉर्ड और मामले से जुड़े कई अहम दस्तावेज़ बरामद किए हैं। CBI ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है और साजिश में शामिल सभी लोगों की भूमिका तथा ऋण राशि के अंतिम उपयोग का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
इनपुट: IANS



