चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े पर अड़ा INDIA गठबंधन, कांग्रेस सांसदों ने लगाए मिलीभगत के आरोप
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी INDIA ब्लॉक के नेताओं ने अपना रुख़ और कड़ा कर दिया है। कांग्रेस के दो सांसदों ने अलग-अलग जगहों पर मीडिया से बात करते हुए न केवल चुनाव आयोग की…
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी INDIA ब्लॉक के नेताओं ने अपना रुख़ और कड़ा कर दिया है। कांग्रेस के दो सांसदों ने अलग-अलग जगहों पर मीडिया से बात करते हुए न केवल चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा नहीं देते, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पटना में कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के बीच मिलीभगत का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश में बने मौजूदा हालात में लोगों का चुनाव आयोग और CEC के कामकाज से भरोसा उठ गया है। सिंह ने कहा, "चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।"
चुनावों में धांधली और लोकतंत्र पर हमला?
अखिलेश प्रसाद सिंह ने बंगाल, असम, हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों का विशेष रूप से ज़िक्र करते हुए दावा किया कि इन राज्यों में "चुनाव चोरी किया गया।" उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में आंदोलन करना स्वाभाविक है और विपक्ष अपनी लड़ाई जारी रखेगा, क्योंकि यह सरकार लोकतंत्र को कुचलने का काम कर रही है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक विपक्ष रुकने वाला नहीं है।"
'वोट चोरी' का मुद्दा
उधर दरभंगा में, पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने भी CEC पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले तीन साल से जिस 'वोट चोरी' का आरोप लगा रहे थे, वह अब दुनिया के सामने आ चुका है। यादव ने कहा, "राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडी गठबंधन लगातार ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को उठा रहा है। हम लोग राहुल गांधी के साथ इस लड़ाई को लड़ने के लिए एकजुट हैं।"
पप्पू यादव ने गांधी जयंती पर दिल्ली के कुछ मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने पर भी तंज कसा। उन्होंने इसे आम आदमी की आज़ादी के 11 घंटे छीनना बताया। साथ ही, उन्होंने दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब देश में संविधान और वोट देने का अधिकार ही सुरक्षित नहीं है, तो लोकतंत्र को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है।
इनपुट: IANS



