खनिज संशोधन विधेयक: हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति को पत्र लिख जताई चिंता, कहा — यह संघीय ढांचे के खिलाफ
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संसद द्वारा पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस विधेयक को संघीय ढांचे के प्रतिकूल बताते हुए…
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संसद द्वारा पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस विधेयक को संघीय ढांचे के प्रतिकूल बताते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से हस्तक्षेप की अपील की है। गुरुवार को भेजे गए पांच पन्नों के इस पत्र में सोरेन ने कहा है कि यह कानून केंद्र-राज्य संबंधों के संतुलन और राज्य की वित्तीय स्वायत्तता के लिए एक गंभीर चुनौती है।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने यह पत्र सोशल मीडिया पर भी साझा किया है। इसमें उन्होंने आशंका जताई है कि यदि यह नया कानून लागू होता है, तो झारखंड को खान-खनिज से मिलने वाले राजस्व का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है, जिसका सीधा असर राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ेगा।
राजस्व पर पड़ेगा बड़ा असर
पत्र में झारखंड के आर्थिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया गया है कि राज्य के अपने गैर-कर राजस्व का लगभग 84.9 प्रतिशत हिस्सा खनन क्षेत्र से आता है। आंकड़ों के मुताबिक, मिनरल बेयरिंग लैंड सेस से राज्य को 2024-25 में 1,379 करोड़ रुपए और 2025-26 में 7,488 करोड़ रुपए की आय हुई। वर्ष 2026-27 के लिए यह अनुमान करीब 13,215 करोड़ रुपए का है। सोरेन ने चिंता जताई कि नए कानून से राज्य को हर साल हजारों करोड़ के राजस्व का नुकसान हो सकता है।
कानूनी और संवैधानिक आपत्तियां
मुख्यमंत्री ने विधेयक की प्रस्तावित नई धारा 9डी पर विशेष आपत्ति जताई है। उनके अनुसार, यह प्रावधान राज्य सरकारों को खनिज वाली भूमि पर कोई भी कर या सेस लगाने के अधिकार को केंद्र की शर्तों और सीमाओं के अधीन कर देगा। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय की नौ-सदस्यीय संविधान पीठ के एक फैसले का भी उल्लेख किया, जिसने राज्यों को खनिज भूमि पर कर लगाने का अधिकार दिया था। इसी फैसले के आधार पर झारखंड विधानसभा ने 2024 में मिनरल बेयरिंग लैंड सेस कानून बनाया था।
विकास और सामाजिक योजनाओं की चिंता
हेमंत सोरेन ने कहा कि राजस्व में कमी का असर सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसी योजनाओं पर पड़ सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे 50 लाख से अधिक महिलाओं को आर्थिक मदद मिल रही है। उन्होंने पत्र में यह भी कहा कि देश के विकास में झारखंड के योगदान की कीमत यहां के आदिवासी समाज ने विस्थापन, प्रदूषण और पारंपरिक रोजगार खोकर चुकाई है, इसलिए खनिज आय का उचित हिस्सा प्रभावित क्षेत्रों पर खर्च होना चाहिए।
अपने पत्र के अंत में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को झारखंड के राज्यपाल के रूप में उनके कार्यकाल (2015-2021) की याद दिलाते हुए कहा कि उन्होंने यहां के आदिवासी और खनन प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को करीब से देखा है। सोरेन ने राष्ट्रपति से विधेयक के प्रभाव पर गंभीरता से विचार करने और संवैधानिक विकल्पों के आधार पर उचित निर्णय लेने का आग्रह किया है।
इनपुट: IANS



