नेपाल में सीमा-पार भूस्खलन की जांच के लिए चीन ने भेजा वैज्ञानिक दल, आपदा के कारणों का लगेगा पता
नेपाल में अगस्त में हुए एक विनाशकारी ग्लेशियर भूस्खलन के कारणों और प्रभावों की जांच के लिए चीन और नेपाल ने एक संयुक्त वैज्ञानिक अभियान शुरू किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस अभियान के तहत 50…
नेपाल में अगस्त में हुए एक विनाशकारी ग्लेशियर भूस्खलन के कारणों और प्रभावों की जांच के लिए चीन और नेपाल ने एक संयुक्त वैज्ञानिक अभियान शुरू किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस अभियान के तहत 50 से अधिक चीनी शोधकर्ताओं का एक दल 4 अक्टूबर को चीन के छेंगदू से नेपाल के लिए रवाना हुआ। यह दल उस आपदा की पूरी प्रक्रिया को समझने का प्रयास करेगा जिसने दोनों देशों की सीमाओं को प्रभावित किया था।
इस वैज्ञानिक टीम में दस से अधिक विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं। गौरतलब है कि इस साल 26 अगस्त को नेपाल के उत्तरी सीमावर्ती इलाके में एक ग्लेशियर अचानक ढह गया था, जिससे सीमा के दोनों ओर भूस्खलन हुआ और भारी जान-माल का नुकसान हुआ।
संयुक्त जांच क्यों है ज़रूरी?
आपदा की शुरुआत भले ही नेपाल में हुई हो, लेकिन इसका असर चीन तक पहुंचा। चीन के शीत्सांग स्वायत्त प्रदेश में स्थित ग्यिरोंग पोर्ट इस घटना से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सीमा-पार आपदा की पूरी तस्वीर को समझने के लिए किसी एक देश द्वारा की गई जांच अपर्याप्त है। इसलिए, नेपाल में घटनास्थल पर जाकर की जाने वाली यह जांच आपदा की पूरी श्रृंखला को फिर से समझने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अत्याधुनिक तकनीक का होगा इस्तेमाल
यह संयुक्त वैज्ञानिक अभियान आपदा की पूरी प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करेगा। इसमें यूएवी (ड्रोन) से हवाई सर्वेक्षण, हेलीकॉप्टर से निगरानी, और क्षेत्र में भूवैज्ञानिक लॉगिंग और नमूने इकट्ठा करने जैसे तरीके शामिल होंगे। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि बर्फ-चट्टान का हिमस्खलन किस तरह मलबे के प्रवाह, भूस्खलन और फिर धाराओं में बदल गया।
इनपुट: IANS



