छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करने से किया इनकार
कथित 2,161 करोड़ रुपये के शराब घोटाले मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को…
कथित 2,161 करोड़ रुपये के शराब घोटाले मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने चैतन्य बघेल को मिली जमानत को रद्द करने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने निचली अदालत द्वारा जांच एजेंसी के खिलाफ की गई कुछ सख्त टिप्पणियों को भी खारिज कर दिया है।
यह मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा जनवरी में चैतन्य बघेल को दी गई जमानत से जुड़ा है। राज्य सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में दलील दी गई थी कि चैतन्य को जमानत मिलने के बाद मामले के मुख्य गवाह सामने आने से डर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट की अहम टिप्पणियां
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने जमानत आदेशों को चुनौती देने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई। बेंच ने पूछा कि क्या सिर्फ इसलिए जमानत रद्द कर दी जानी चाहिए क्योंकि आदेश में पर्याप्त कारण नहीं बताए गए हैं। बेंच ने कहा कि इस मामले से जुड़े कानूनी मुद्दे भविष्य की सुनवाई के लिए खुले रहेंगे।
वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने बघेल का पक्ष रखा, जबकि एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने भी यह माना कि कानूनी रूप से गलत जमानत आदेश हमेशा आरोपी की स्वतंत्रता को रद्द करने का आधार नहीं हो सकता।
जांच एजेंसी पर हाईकोर्ट की टिप्पणी खारिज
सुनवाई के दौरान एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू हाईकोर्ट की टिप्पणियों का था। हाईकोर्ट ने शराब घोटाले में 'पिक एंड चूज' का तरीका अपनाने और चुनिंदा गिरफ्तारियां करने के लिए राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की आलोचना की थी। वरिष्ठ वकील जेठमलानी ने इसे गैर-जरूरी बताया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इन प्रतिकूल टिप्पणियों को 'पूरी तरह से अनावश्यक' बताते हुए खारिज कर दिया।
उल्लेखनीय है कि इस कथित घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों कर रहे हैं। ED का आरोप है कि 2019 से 2022 के बीच छत्तीसगढ़ के सरकारी खजाने में भारी वित्तीय गड़बड़ी की गई थी।
इनपुट: IANS



