चीन करेगा 2025 में ब्रिक्स की मेजबानी, शी जिनपिंग ने सहयोग के 'तीसरे स्वर्णिम दशक' का संकल्प लिया
चीन वर्ष 2025 में ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता ग्रहण करेगा और 19वें शिखर सम्मेलन का आयोजन करेगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार को इसकी घोषणा करते हुए…
चीन वर्ष 2025 में ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता ग्रहण करेगा और 19वें शिखर सम्मेलन का आयोजन करेगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि उनका देश इस अवसर का उपयोग भविष्य की योजना बनाने और सभी पक्षों के साथ आम सहमति बनाने के लिए करेगा।
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर राष्ट्रपति शी के बयान को साझा किया। इस बयान में कहा गया है कि चीन सभी देशों के साथ मिलकर "ब्रिक्स सहयोग के तीसरे स्वर्णिम दशक की शुरुआत करेगा।"
मध्य-पूर्व और वैश्विक शांति पर जोर
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस युद्ध ने क्षेत्र के लोगों को गंभीर नुकसान पहुँचाया है, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के विरुद्ध है। शी ने सभी संबंधित पक्षों से स्थायी और व्यापक युद्धविराम के लिए प्रयास करने और राजनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि चीन ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर मध्य-पूर्व में शांति और स्थिरता कायम करने में अपनी भूमिका निभाएगा।
यह घोषणा 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन के ठीक बाद हुई है, जहाँ नेताओं ने बढ़ते वैश्विक ध्रुवीकरण और अविश्वास पर चिंता जताई थी। नई दिल्ली में शनिवार को अपनाई गई ‘2026 नई दिल्ली घोषणा’ में सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सामूहिक वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
'2026 नई दिल्ली घोषणा' के मुख्य बिंदु
ब्रिक्स नेताओं ने अपनी संयुक्त घोषणा में कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ध्रुवीकरण और अविश्वास बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मौजूदा चुनौतियों और सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक उपायों का सहारा लेना चाहिए।
घोषणापत्र में इस बात को भी रेखांकित किया गया कि सभी देशों की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी और अविभाज्य है। नेताओं ने संवाद, परामर्श और कूटनीति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। इसके साथ ही संघर्षों को रोकने और उनके मूल कारणों को दूर करने के प्रयासों पर भी बल दिया गया।
इनपुट: IANS



