रविवार, 23 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
अपराध

DGCA के पूर्व अधिकारी पर भ्रष्टाचार का शिकंजा, CBI ने रिश्तेदारों की कंपनियों के ज़रिए करोड़ों की धांधली का केस दर्ज किया

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी पर अपने पद का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये का अनुचित लाभ कमाने का गंभीर आरोप लगा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)…

DGCA के पूर्व अधिकारी पर भ्रष्टाचार का शिकंजा, CBI ने रिश्तेदारों की कंपनियों के ज़रिए करोड़ों की धांधली का केस दर्ज किया
(फोटो: IANS)

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी पर अपने पद का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये का अनुचित लाभ कमाने का गंभीर आरोप लगा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने फ्लाइंग ट्रेनिंग के तत्कालीन निदेशक (DFT) कैप्टन अनिल गिल और कई अन्य लोगों व कंपनियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया है।

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आरोप है कि गिल ने कुछ चुनिंदा फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTOs) को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रखा। उन्होंने कथित तौर पर अपने करीबी रिश्तेदारों द्वारा संचालित कंपनियों के माध्यम से सस्ते प्रशिक्षण विमान खरीदे और फिर उन्हीं विमानों को पसंदीदा FTOs को ऊंची दरों पर लीज पर देकर अवैध कमाई की।

अनिल गिल पर क्या हैं आरोप?

सीबीआई ने 21 अगस्त को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत यह केस दर्ज किया। एफआईआर के मुताबिक, जांच की शुरुआत 7 अप्रैल 2025 को मिली एक शिकायत के बाद हुई थी। इसमें कहा गया है कि गिल ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग कर कुछ खास FTOs को फायदा पहुंचाया, जिससे अन्य ऑपरेटरों को आर्थिक नुकसान हुआ।

जांच में सामने आया है कि गिल के रिश्तेदारों ने कई कंपनियां बनाईं, जिनमें ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड (BAGPL), सबर्स कॉरपोरेट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और सैंडहिल्स एविएशन आईएफएससी प्राइवेट लिमिटेड शामिल थीं। इन कंपनियों के निदेशकों में गिल की मां, मौसी, चचेरे भाई और भाभी शामिल थे।

सस्ते विमान, महंगी लीज और करोड़ों की कमाई

एफआईआर के अनुसार, BAGPL ने दो सेसना विमान सिर्फ 10 लाख रुपये और 37.5 लाख रुपये में खरीदे। बाद में, इन्हीं दोनों विमानों को रेडबर्ड एविएशन एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दे दिया गया। इस सौदे को मंजूरी कथित तौर पर खुद अनिल गिल ने अपनी आधिकारिक हैसियत से दी थी।

आंकड़ों के मुताबिक, 2021 से अक्टूबर 2023 के बीच BAGPL ने अकेले रेडबर्ड एविएशन एकेडमी से ही लीज के किराए के तौर पर 2.16 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई की।

मंजूरी में पक्षपात और भाई-भतीजावाद

सीबीआई ने अपनी एफआईआर में यह भी आरोप लगाया है कि रेडबर्ड एविएशन एकेडमी को FTO की शुरुआती मंजूरी सिर्फ एक महीने और तीन दिन में मिल गई, जबकि आमतौर पर अन्य कंपनियों को इसमें चार से छह महीने लग जाते हैं।

इसके अलावा, सितंबर 2022 में गिल ने एक चयन समिति की अध्यक्षता की, जिसने उनके चचेरे भाई विकास नैन को डिप्टी चीफ फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर के रूप में चुना। बाद में रेडबर्ड एविएशन एकेडमी ने उन्हें लगभग 6.5 लाख रुपये प्रति माह के वेतन पर नियुक्त कर लिया।

सीबीआई की एफआईआर में कैप्टन अनिल गिल के अलावा रेडबर्ड एविएशन एकेडमी, ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल और अन्य संबंधित कंपनियों समेत अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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