गुरूवार, 24 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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जस्टिस वर्मा कैश मामला: रिटायर्ड जज ढींगरा ने 'ब्रदर जज' सिस्टम पर उठाए सवाल, बोले- एक-दूसरे को बचाते हैं

इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से नकदी मिलने के मामले में रिटायर्ड जस्टिस एस.एन. ढींगरा ने न्यायपालिका की आंतरिक कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है। समाचार एजेंसी IANS से…

जस्टिस वर्मा कैश मामला: रिटायर्ड जज ढींगरा ने 'ब्रदर जज' सिस्टम पर उठाए सवाल, बोले- एक-दूसरे को बचाते हैं
(फोटो: IANS)

इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से नकदी मिलने के मामले में रिटायर्ड जस्टिस एस.एन. ढींगरा ने न्यायपालिका की आंतरिक कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस मामले में पहले दिन ही FIR दर्ज होनी चाहिए थी, लेकिन 'ब्रदर जज' एक-दूसरे की रक्षा करते हैं। उनका यह बयान जांच समिति द्वारा 12 अगस्त को अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद आया है।

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रिटायर्ड जस्टिस ढींगरा के अनुसार, इस जांच समिति की रिपोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट कमेटी के उन निष्कर्षों की पुष्टि कर दी है, जिनमें जस्टिस वर्मा को दोषी पाया गया था। उन्होंने कहा, "इस रिपोर्ट ने जस्टिस यसवंत वर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट कमेटी की रिपोर्ट को कन्फर्म किया है। रिपोर्ट ने ये कहा है कि उनके घर के स्टोर से जो कैश मिला है, उन्हीं का था और उन्हीं की जवाबदेही है। उन्होंने यह भी कोशिश की कि सबूतों को हटाया जाए। वो इस बात के लिए दोषी हैं।"

महाभियोग और इस्तीफे का कानूनी पहलू

जस्टिस ढींगरा ने स्पष्ट किया कि चूंकि जस्टिस वर्मा पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं, इसलिए अब उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा, "अगर किसी जज ने अपने हाथ से इस्तीफा लिखकर राष्ट्रपति को दिया है, तो वो इस्तीफा उस दिन से लागू माना जाता है।" महाभियोग का उद्देश्य किसी न्यायाधीश को पद से हटाना होता है, जो यहां संभव नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि खबरों में जस्टिस वर्मा को अब भी 'इलाहाबाद हाईकोर्ट न्यायाधीश' क्यों लिखा जा रहा है।

आपराधिक कार्रवाई और FIR में देरी

आपराधिक कार्रवाई के सवाल पर जस्टिस ढींगरा ने कहा कि जांच समिति खुद कोई एक्शन नहीं ले सकती; उसका काम सिर्फ यह तय करना था कि जस्टिस वर्मा दोषी हैं या नहीं। अब आगे की कार्रवाई लोकसभा स्पीकर को करनी है। उन्होंने FIR दर्ज न होने पर निराशा जताते हुए कहा, "इस मामले में एफआईआर पहले दिन होनी चाहिए थी, जब ये कैश मिला था। अंदाजा लगाया गया कि 15-50 करोड़ के बीच में कैश था।" उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को रिपोर्ट मिलने पर तुरंत पुलिस को FIR दर्ज करने और सबूत इकट्ठा करने का निर्देश देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जस्टिस ढींगरा के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट भी FIR के लिए दायर दो याचिकाएं पहले ही खारिज कर चुका है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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