ब्रिक्स समूह: 20 साल का सफर और ग्लोबल साउथ के लिए बढ़ती अहमियत
ब्रिक्स समूह, जो दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक प्रमुख मंच है, अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर चुका है। हाल ही में नई दिल्ली में संपन्न हुए 18वें शिखर सम्मेलन ने एक बार फिर इस समूह की बढ़ती ताक…
ब्रिक्स समूह, जो दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक प्रमुख मंच है, अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर चुका है। हाल ही में नई दिल्ली में संपन्न हुए 18वें शिखर सम्मेलन ने एक बार फिर इस समूह की बढ़ती ताकत और 'ग्लोबल साउथ' की आकांक्षाओं को दुनिया के सामने रखा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह सम्मेलन इस बात का भी प्रतीक है कि बड़े विकासशील देश आपसी सहयोग से वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एक स्थिर शक्ति के रूप में उभर सकते हैं।
शुरुआत में चार सदस्य देशों से मिलकर बना यह संगठन अब 11 औपचारिक सदस्यों और 10 साझेदार देशों तक फैल चुका है, जो बदलते वैश्विक समीकरणों को दर्शाता है। यह समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। इसका कुल आर्थिक उत्पादन वैश्विक जीडीपी का लगभग 30% है, जबकि वैश्विक व्यापार में इसकी हिस्सेदारी 20% है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का अनुमान है कि 2028 तक 'ग्रेटर ब्रिक्स' की आर्थिक विकास दर जी7 देशों की तुलना में तीन गुना अधिक होगी।
सहयोग और विकास की नींव
ब्रिक्स के भीतर सहयोग केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके ठोस परिणाम भी सामने आ रहे हैं। समूह के नव विकास बैंक (New Development Bank) ने इस साल की पहली तिमाही तक 42.9 अरब डॉलर की 140 निवेश परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिससे यह 'ग्लोबल साउथ' के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय स्रोत बन गया है। इसी तरह, 2026 में नई औद्योगिक क्रांति में साझेदारी पर ब्रिक्स फोरम के तहत 11 शहरों ने एक नेटवर्क बनाना शुरू किया है, जो सहयोग को राष्ट्रीय स्तर से शहरी स्तर तक ले जा रहा है।
चीन-भारत की भूमिका
इस सहयोग को आगे बढ़ाने में चीन और भारत की भूमिका अहम है। इस साल भारत और अगले साल चीन ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेंगे, जिससे आपसी समन्वय बढ़ने की उम्मीद है। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने यह स्पष्ट किया है कि वे प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार हैं और एक-दूसरे के विकास के लिए अवसर पैदा करते हैं। 2025 में दोनों देशों के बीच व्यापार 1 खरब 55 अरब 60 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। इसके अलावा, छह साल के अंतराल के बाद सीमा व्यापार फिर से शुरू हुआ और पांच सीधी उड़ानों को भी बहाल किया गया है। सुरक्षा के मोर्चे पर भी सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं बैठक में आठ-सूत्री सहमति बनी, जिसका उद्देश्य सीमा पर शांति बनाए रखना है।
चुनौतियां और भविष्य की राह
हालांकि, ग्लोबल साउथ के विकास की राह चुनौतियों से खाली नहीं है। सदस्य देशों के बीच विकास का अंतर, विदेशी तकनीक पर निर्भरता और वैश्वीकरण-विरोधी सोच जैसी समस्याएं मौजूद हैं। विस्तार के साथ समूह का प्रतिनिधित्व तो बढ़ा है, लेकिन किसी मुद्दे पर आम सहमति बनाना अब और मुश्किल हो सकता है। फिर भी, ब्रिक्स की खासियत यह है कि यह सदस्यों को 'रणनीतिक अलगाव के बिना रणनीतिक स्वायत्तता' का मंच देता है। यह मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को खत्म करने के बजाय, उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक समानांतर संस्थागत स्थान बनाने का प्रयास करता है।
इनपुट: IANS



