शनिवार, 12 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: परमाणु अप्रसार और आतंकवाद पर सदस्य देशों ने जताई साझा चिंता, बहुपक्षीय सहयोग पर जोर

भारत की अध्यक्षता में संपन्न हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक शांति और सुरक्षा को लेकर सदस्य देशों ने एक मजबूत साझा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दो दिवसीय…

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: परमाणु अप्रसार और आतंकवाद पर सदस्य देशों ने जताई साझा चिंता, बहुपक्षीय सहयोग पर जोर
(फोटो: IANS)

भारत की अध्यक्षता में संपन्न हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक शांति और सुरक्षा को लेकर सदस्य देशों ने एक मजबूत साझा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दो दिवसीय सम्मेलन के समापन पर जारी एक विस्तृत संयुक्त बयान में दुनिया में बढ़ते परमाणु संघर्ष के जोखिमों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई और निरस्त्रीकरण की व्यवस्था को फिर से प्रभावी बनाने का आह्वान किया गया।

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सम्मेलन की थीम “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण” थी। इसी भावना के तहत, नेताओं ने आपसी सम्मान, संप्रभु समानता और लोकतंत्र जैसे मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी का मुख्य उद्देश्य शांति को बढ़ावा देना, एक न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था स्थापित करना और सदस्य देशों के लोगों के हित में सतत विकास सुनिश्चित करना है।

परमाणु अप्रसार और वैश्विक सुरक्षा

बयान में परमाणु खतरे को एक गंभीर वैश्विक चुनौती के रूप में स्वीकार किया गया। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए हथियार नियंत्रण और परमाणु अप्रसार संधियों की अखंडता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। समूह ने दुनिया भर में परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्रों के महत्व को रेखांकित करते हुए अपना समर्थन दोहराया। विशेष रूप से, मध्य पूर्व को परमाणु और अन्य सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त क्षेत्र बनाने के प्रयासों में तेजी लाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

आतंकवाद पर कड़ा रुख

140 बिंदुओं वाले प्रस्ताव में आतंकवाद का मुकाबला एक प्रमुख प्राथमिकता के रूप में उभरा। भारत के लिए विशेष रूप से अहम बिंदु संख्या 40 और 41 में आतंकवाद को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया गया। इसमें जम्मू-कश्मीर में 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई, जिसमें 26 लोग मारे गए थे।

बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया, “हम आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, टेरर फंडिंग और सुरक्षित पनाहगाहों सहित सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद से लड़ने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।” नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता या सभ्यता से नहीं जोड़ा जाना चाहिए और इसमें शामिल सभी लोगों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। समूह ने आतंकवाद के प्रति 'शून्य सहिष्णुता' और दोहरे मानकों को अस्वीकार करने का आग्रह किया।

विस्तारित ब्रिक्स और बहुपक्षीय सहयोग

शिखर सम्मेलन में विस्तारित ब्रिक्स में सहयोग को और मजबूत करने पर भी सहमति बनी। राजनीतिक-सुरक्षा, आर्थिक-वित्तीय और सांस्कृतिक सहयोग के तीन स्तंभों के तहत काम को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। नेताओं ने ब्रिक्स काउंटर-टेररिज्म वर्किंग ग्रुप (CTWG) की गतिविधियों का स्वागत किया और 'अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक कन्वेंशन' को शीघ्र अंतिम रूप देने का आह्वान किया। इसके अलावा, सम्मेलन में विकासशील देशों के साथ साझेदारी को गहरा करने और एक समावेशी वैश्विक व्यवस्था को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की गई।

इनपुट: IANS

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