ब्रिटेन में ब्रेक्सिट पर फिर बहस: टोनी ब्लेयर ने दशक भर में EU में वापसी का रोडमैप सुझाया
ब्रिटेन में यूरोपीय संघ (ईयू) से बाहर निकलने के फैसले, यानी ब्रेक्सिट के लगभग एक दशक बाद, इस पर पुनर्विचार की मांग जोर पकड़ रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री टोनी…
ब्रिटेन में यूरोपीय संघ (ईयू) से बाहर निकलने के फैसले, यानी ब्रेक्सिट के लगभग एक दशक बाद, इस पर पुनर्विचार की मांग जोर पकड़ रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने सुझाव दिया है कि ब्रिटेन को अगले 10 वर्षों के भीतर यूरोपीय संघ में फिर से शामिल होने का लक्ष्य रखना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब जनमत सर्वेक्षणों में भी ईयू के साथ घनिष्ठ संबंधों के लिए समर्थन बढ़ रहा है।
टोनी ब्लेयर के थिंक टैंक 'टोनी ब्लेयर इंस्टीट्यूट' द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट में इस वापसी के लिए एक विस्तृत खाका पेश किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन को एक ऐसे "सुधार किए हुए ईयू" में शामिल होने का लक्ष्य रखना चाहिए जो बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुकूल हो। ब्लेयर ने कहा, "ब्रिटेन को यूरोप के साथ अपने भविष्य के संबंधों को केवल इस सवाल के रूप में नहीं देखना चाहिए कि क्या वह ब्रेक्सिट को पलट रहा है, बल्कि यह देखना चाहिए कि मौजूदा राष्ट्रीय हितों के लिए यूरोप के साथ किस तरह का संबंध सबसे उपयुक्त होगा।"
पुनर्प्रवेश की शर्तें और चुनौतियाँ
ब्लेयर के प्रस्ताव के मुताबिक, ईयू में वापसी के लिए ब्रिटेन को कुछ पुरानी व्यवस्थाओं को स्वीकार करने के लिए तैयार रहना होगा। इसमें लोगों की मुक्त आवाजाही (Free Movement) और ईयू के लिए वित्तीय योगदान जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं, जिन पर ब्रिटेन को रियायतें देनी पड़ सकती हैं। हालांकि, रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि ईयू को भी खुद में सुधार करने की जरूरत है।
पुन: सदस्यता का रास्ता सिर्फ ब्रिटेन के फैसले पर निर्भर नहीं करेगा। इसके लिए ब्रसेल्स और अन्य यूरोपीय सदस्य देशों की सहमति भी अनिवार्य होगी। ईयू पहले ही संकेत दे चुका है कि वापसी की स्थिति में ब्रिटेन को अन्य सदस्यों की तरह सभी नियमों और दायित्वों का पालन करना होगा। यह भी एक बड़ा सवाल है कि क्या ब्रिटेन को अतीत में मिली विशेष छूट और बजट संबंधी रियायतें दोबारा मिल पाएंगी।
राजनीतिक परिदृश्य और मौजूदा प्रयास
ब्रिटेन की घरेलू राजनीति में भी यह एक जटिल मुद्दा बना हुआ है। 'द गार्डियन' के अनुसार, प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने अगले चुनाव के घोषणापत्र में ईयू सदस्यता के सवाल को पूरी तरह खारिज तो नहीं किया है, लेकिन उनका मौजूदा ध्यान ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बीच व्यावहारिक संबंधों को मजबूत करने पर है।
इस बीच, ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन और ईयू के बीच संबंधों को सुधारने के प्रयास पहले से ही चल रहे हैं। सरकार व्यापार, सुरक्षा, विज्ञान और अन्य क्षेत्रों में यूरोपीय देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रही है। साथ ही, युवाओं की आवाजाही और ऊर्जा जैसे मुद्दों पर बातचीत जारी है।
इनपुट: IANS



