ब्रिटेन में बसे यूरोपीय नागरिकों की बढ़ी चिंता, सरकार बोली - 'गलती से दिया था निवास का अधिकार'
ब्रेक्जिट के कई साल बाद भी ब्रिटेन में रह रहे यूरोपीय संघ (ईयू) के नागरिकों के लिए मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। अब एक नए घटनाक्रम में, ब्रिटिश गृह मंत्रालय (होम ऑफिस) ने हजारों लोगों को पत्र भेजकर…
ब्रेक्जिट के कई साल बाद भी ब्रिटेन में रह रहे यूरोपीय संघ (ईयू) के नागरिकों के लिए मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। अब एक नए घटनाक्रम में, ब्रिटिश गृह मंत्रालय (होम ऑफिस) ने हजारों लोगों को पत्र भेजकर सूचित किया है कि उन्हें दिया गया 'प्री-सेटल्ड स्टेटस' एक प्रशासनिक भूल थी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम ने प्रभावित लोगों में अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।
इन पत्रों में स्पष्ट कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति ब्रेक्जिट के लिए निर्धारित समय-सीमा तक पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते थे, इसलिए उन्हें दिया गया निवास का दर्जा (रेजिडेंसी स्टेटस) वैध नहीं है। सरकार अब उनके ब्रिटेन में रहने के अधिकार की नए सिरे से समीक्षा करेगी।
किन लोगों पर पड़ा है असर?
यह फैसला उन लोगों के लिए एक बड़ा झटका है जो वर्षों से ब्रिटेन में काम कर रहे हैं, टैक्स चुका रहे हैं, पढ़ाई कर रहे हैं या अपने परिवारों के साथ रह रहे हैं। उन्हें उम्मीद थी कि पांच साल की अवधि पूरी होने के बाद उनका 'प्री-सेटल्ड स्टेटस' स्थायी 'सेटल्ड स्टेटस' में बदल जाएगा, लेकिन इस सरकारी सूचना ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया है।
गृह मंत्रालय अब उन मामलों की विशेष रूप से जांच कर रहा है, जिन्हें अपने स्टेटस को 'सेटल्ड' में बदलने के लिए आवेदन करने की आवश्यकता है। इनमें बच्चे, गैर-यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र (नॉन-ईईए) के नागरिक और 31 दिसंबर 2020 के बाद ब्रिटेन आए लोग शामिल हैं।
सरकार का आधिकारिक पत्र
प्रभावित लोगों को भेजे गए पांच पन्नों के पत्र में लिखा है, “हमारे ध्यान में आया है कि आपको 31 दिसंबर 2020 की आधी रात से पहले, जब यूके ने ईयू से कानूनी तौर पर रिश्ते खत्म कर लिए थे, 'संबंधित ईईए नागरिक' की परिभाषा को पूरा करने के लिए जरूरी सबूत के बिना प्री-सेटल्ड स्टेटस दिया गया था।” पत्र में आगे कहा गया है, “अभी जो जानकारी और सबूत मौजूद हैं, उनके आधार पर, यह माना जाता है कि आपका प्री-सेटल्ड स्टेटस गलती से दिया गया था।”
द गार्डियन की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए, एजेंसी ने बताया कि गृह मंत्रालय ने यह खुलासा करने से इनकार कर दिया है कि कुल कितने लोगों को यह पत्र भेजा गया है। हालांकि, '3 मिलियन' नामक एक कैंपेन ग्रुप को सूचना की स्वतंत्रता (Freedom of Information) अनुरोध के तहत बताया गया कि अकेले मार्च महीने में ही 95 लोगों से संपर्क किया गया था।
इनपुट: IANS



