मुंबई: बीएमसी के डॉक्टरों ने OPD सेवाएं रोकीं, जानें क्यों सरकारी अस्पतालों में हड़ताल
मुंबई के चार बड़े सरकारी अस्पतालों में बुधवार से सामान्य ओपीडी सेवाएं अनिश्चित काल के लिए बंद कर दी गई हैं। बीएमसी महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (बीएमसी मार्ड) के आह्वान पर यह कदम उठाया…
मुंबई के चार बड़े सरकारी अस्पतालों में बुधवार से सामान्य ओपीडी सेवाएं अनिश्चित काल के लिए बंद कर दी गई हैं। बीएमसी महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (बीएमसी मार्ड) के आह्वान पर यह कदम उठाया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, डॉक्टरों का यह विरोध महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें होम्योपैथी (बीएचएमएस) के डॉक्टरों को एक विशेष कोर्स के बाद महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
इस हड़ताल का असर केईएम अस्पताल, लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल मेडिकल कॉलेज और जनरल अस्पताल (सायन), बीवाईएल नायर अस्पताल और डॉ. आरएन कूपर अस्पताल की ओपीडी सेवाओं पर पड़ रहा है। हालांकि, मरीजों को असुविधा से बचाने के लिए डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि आपातकालीन सेवाएं, कैजुअल्टी, आईसीयू, लेबर रूम और इन-पेशेंट डिपार्टमेंट (आईपीडी) समेत सभी आवश्यक सेवाएं पहले की तरह पूरी तरह चालू रहेंगी।
क्यों हो रहा है विरोध?
बीएमसी मार्ड ने सरकार के इस कदम को मेडिकल शिक्षा के स्तर और पेशे की साख से समझौता बताया है। संगठन का कहना है कि वे हर मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका विरोध 'क्रॉसपैथी' को बढ़ावा देने और आधुनिक चिकित्सा की गुणवत्ता को कमजोर करने के खिलाफ है। जारी एक बयान में कहा गया, "हम चुप नहीं बैठ सकते जब मेडिकल शिक्षा के स्तर, पेशे की साख और मरीजों की सुरक्षा से समझौता किया जा रहा हो।"
डॉक्टरों की प्रमुख मांगें
डॉक्टरों ने सरकार और प्रशासन के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं। उनकी पहली और सबसे अहम मांग यह है कि सीसीएमपी कोर्स कर चुके बीएचएमएस डॉक्टरों को एमएमसी में पंजीकरण देने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से रोकी जाए। दूसरी मांग है कि इस मामले में हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आने तक कोई भी कदम न उठाया जाए। इसके अलावा, संगठन ने रेजिडेंट डॉक्टरों के लंबे समय से लंबित मुद्दों पर बीएमसी और सरकार से तत्काल बातचीत शुरू करने की भी मांग की है।
बीएमसी मार्ड ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर उनकी मांगें नहीं मानी गईं और पंजीकरण प्रक्रिया नहीं रोकी गई, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। संगठन ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों से सेवाओं में और कटौती भी की जा सकती है।
इनपुट: IANS



