चेन्नई: प्रस्तावित सचिवालय कॉम्प्लेक्स के खिलाफ मछुआरों का विरोध तेज, रविवार को निकालेंगे काला झंडा मार्च
तमिलनाडु सरकार द्वारा चेन्नई के पट्टिनापक्कम इलाके में नए विधानसभा और सचिवालय कॉम्प्लेक्स के निर्माण का प्रस्ताव मछुआरा समुदाय के कड़े विरोध का सामना कर रहा है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, अपने…
तमिलनाडु सरकार द्वारा चेन्नई के पट्टिनापक्कम इलाके में नए विधानसभा और सचिवालय कॉम्प्लेक्स के निर्माण का प्रस्ताव मछुआरा समुदाय के कड़े विरोध का सामना कर रहा है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, अपने अभियान को तेज करते हुए 10 तटीय गांवों के मछुआरे रविवार को काले झंडे के साथ एक मार्च निकालेंगे।
यह विरोध प्रदर्शन माइलापुर क्षेत्र की सभी मछुआरा ग्राम पंचायत परिषद के बैनर तले आयोजित किया जा रहा है और इसका केंद्र मुल्लिकुप्पम-श्रीनिवासपुरम लूप रोड जंक्शन होगा। मछुआरे इस परियोजना के विरोध में समुद्र तट पर काले झंडे भी फहराएंगे। यह 29 सितंबर को हुए पिछले प्रदर्शन के बाद इस श्रृंखला का नया विरोध है, जिसमें भी सरकार से प्रस्ताव वापस लेने की मांग की गई थी।
विरोध का मुख्य कारण
मछुआरों की मुख्य मांग सरकारी आदेश (जीओ) संख्या 564 को रद्द करना है, जिसके तहत इस कॉम्प्लेक्स के निर्माण की योजना है। उनका तर्क है कि यह जमीन पारंपरिक मछुआरा समुदाय के कल्याण, पुनर्वास और आवास की जरूरतों के लिए आरक्षित की गई थी और इसका किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
परिषद का कहना है कि सर्वे नंबर 4592 और 4593 की यह भूमि मूल रूप से 10 अक्टूबर, 1957 के एक सरकारी आदेश (जीओ एमएस नंबर 3313) के तहत विशेष रूप से मछुआरों के पुनर्वास के लिए ही अधिग्रहित की गई थी। परिषद के अनुसार, इस जमीन पर प्रशासनिक कॉम्प्लेक्स बनाना इसके अधिग्रहण के मूल उद्देश्य और समुदाय को दिए गए आश्वासनों का उल्लंघन होगा।
समुदाय की मांगें और तर्क
मछुआरों ने निवासियों को हटाने के किसी भी प्रयास का विरोध करते हुए राज्य के जलवायु जोखिम आकलन का भी हवाला दिया है। उनका दावा है कि इन आकलनों के अनुसार, 2050 और 2100 तक समुद्र के जल स्तर में अनुमानित वृद्धि के बावजूद मुल्लिकुप्पम का क्षेत्र काफी हद तक सुरक्षित रहेगा। समुदाय ने सरकार से आग्रह किया है कि 'कोस्टल रेगुलेशन जोन नोटिफिकेशन, 2019' के तहत इस क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर मछुआरों के रिहायशी जोन के रूप में मान्यता दी जाए।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से प्रस्तावित आवंटन पर पुनर्विचार करने और इस परियोजना पर आगे बढ़ने से पहले स्थानीय निवासियों के साथ संवाद करने की अपील की है।
इनपुट: IANS



