बिहार: 'सहयोग शिविर' में तीन महीनों में 96% मामलों का निपटारा, 6.20 लाख आवेदनों पर हुई कार्रवाई
बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल पर शुरू की गई 'सहयोग शिविर' योजना आम लोगों की समस्याओं के समाधान में काफी प्रभावी साबित हो रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब तीन…
बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल पर शुरू की गई 'सहयोग शिविर' योजना आम लोगों की समस्याओं के समाधान में काफी प्रभावी साबित हो रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब तीन महीनों में इस कार्यक्रम के तहत प्राप्त 6.46 लाख से अधिक आवेदनों में से लगभग 96 प्रतिशत का निपटारा कर दिया गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को उनकी छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाना है।
सहयोग पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य भर में आयोजित शिविरों में कुल 6,46,181 आवेदन मिले थे। इनमें से 6,20,030 मामलों का निष्पादन किया जा चुका है। इसमें 5,98,639 आवेदनों का समाधान किया गया, जबकि 21,391 आवेदनों को विभिन्न कारणों से अस्वीकृत कर दिया गया। सरकार का लक्ष्य बाकी बचे लगभग 4 प्रतिशत लंबित मामलों को भी तय समय-सीमा के भीतर निपटाना है।
कैसी है 'सहयोग शिविर' की व्यवस्था?
इस योजना की शुरुआत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 19 मई 2026 को सारण जिले के सोनपुर प्रखंड के डुमरी बुजुर्ग गांव से की थी। इसके तहत हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को पंचायत स्तर पर शिविर लगाए जाते हैं। वहीं, प्रत्येक महीने के दूसरे मंगलवार को एक राज्य-स्तरीय शिविर का आयोजन होता है, जिसमें मुख्यमंत्री खुद मौजूद रहकर लोगों की शिकायतें सुनते हैं और अधिकारियों को समाधान के लिए निर्देश देते हैं। किसी भी आवेदन के निपटारे के लिए अधिकतम 30 दिनों की समय-सीमा तय की गई है, और मुख्यमंत्री सचिवालय सीधे इसकी निगरानी करता है।
राज्य भर में अभियान का विस्तार
अब तक राज्य की कुल 8,032 पंचायतों में से 6,533 पंचायतों और सभी 534 प्रखंडों में ये शिविर आयोजित हो चुके हैं। सरकार का कहना है कि अगले एक-दो चरणों में बची हुई पंचायतों को भी इस अभियान से जोड़ लिया जाएगा। एक अधिकारी के अनुसार, पंचायत स्तर पर शिविर लगने से लोगों के समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है। मामलों के निपटारे में शेखपुरा, सहरसा, शिवहर, खगड़िया और भोजपुर शीर्ष 10 जिलों में शामिल हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पंचायतों में एक बार शिविर लग जाने के बाद भी यह व्यवस्था जारी रहेगी, ताकि जनसमस्याओं का त्वरित समाधान होता रहे।
इनपुट: IANS



