शनिवार, 15 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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मधुबनी: जेल में युवक की मौत पर प्रशांत किशोर ने उठाई आवाज़, 10 दिन में न्याय न मिलने पर दी चेतावनी

बिहार के मधुबनी में 19 वर्षीय रौशन यादव की जेल में हुई मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए पीड़ित परिवार के साथ एसएसपी कार्यालय…

मधुबनी: जेल में युवक की मौत पर प्रशांत किशोर ने उठाई आवाज़, 10 दिन में न्याय न मिलने पर दी चेतावनी
(फोटो: IANS)

बिहार के मधुबनी में 19 वर्षीय रौशन यादव की जेल में हुई मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए पीड़ित परिवार के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, एसएसपी ने प्रशांत किशोर को 10 दिनों के भीतर जांच पूरी कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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प्रशांत किशोर ने चेतावनी दी है कि अगर 10 दिनों में परिवार को न्याय नहीं मिला, तो वह दोबारा मधुबनी आएंगे और ज़रूरत पड़ने पर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) व मुख्य सचिव से भी मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीति से ज़्यादा मानवता का है और बेहद गरीब परिवार को न्याय मिलना चाहिए।

क्या है रौशन यादव की मौत का पूरा मामला?

परिवार वालों का आरोप है कि मधुबनी के बिलाट गांव के रहने वाले रौशन को रहीका थाना पुलिस ने 27 मई को गिरफ्तार किया था। इसकी सूचना परिवार को नहीं दी गई। तीन दिन बाद जब परिवार वाले थाने पहुंचे तो रौशन ने अपने साथ मारपीट और करंट लगाकर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया।

परिवार के मुताबिक, 31 मई को पुलिस ने रौशन को छोड़ दिया, लेकिन आधे घंटे बाद ही उसे आर्म्स एक्ट के एक मामले में दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया, जहां करीब दो महीने बाद उसकी मौत हो गई।

पुलिस का पक्ष और जांच का आश्वासन

पुलिस और जेल प्रशासन रौशन की मौत को आत्महत्या बता रहा है, जबकि परिवार का आरोप है कि पुलिस प्रताड़ना के कारण उसकी जान गई। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले की जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के दिशा-निर्देशों के तहत हो रही है और जिलाधिकारी के स्तर से भी एक जांच चल रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार है।

एसएसपी ने प्रशांत किशोर को भरोसा दिलाया है कि इस बात की जांच की जाएगी कि रौशन को 27 मई को क्यों गिरफ्तार किया गया, परिवार को सूचित क्यों नहीं किया गया और क्या उसे बिना कोर्ट में पेश किए थाने में रखा गया था। मारपीट और प्रताड़ना के आरोपों की भी गहन जांच होगी।

इनपुट: IANS

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News4Social बिहार डेस्क

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