छत्तीसगढ़: नक्सली भय से मुक्ति के बाद अबूझमाड़ के 9 गांवों में पहली बार लहराया तिरंगा
छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र के नौ गांवों के लिए इस साल का स्वतंत्रता दिवस एक ऐतिहासिक अवसर लेकर आया। आजादी के बाद पहली बार इन गांवों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, जो दशकों से नक्सली हिंसा के साये…
छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र के नौ गांवों के लिए इस साल का स्वतंत्रता दिवस एक ऐतिहासिक अवसर लेकर आया। आजादी के बाद पहली बार इन गांवों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, जो दशकों से नक्सली हिंसा के साये में जी रहे समुदायों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आयोजन भय के युग की समाप्ति और लोकतांत्रिक जीवन में खुली भागीदारी की नई शुरुआत का प्रतीक है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कोरस्कोडो, हाचेकोटी, अदनार, बोटर, कुमनार, दीवालूर, गुंडेकोट, रेकापाल और रस्मेता गांवों के निवासियों ने दशकों पुराने डर से मुक्त होकर पूरे गर्व और उत्साह के साथ इस मौके को मनाया। जब इन गांवों में तिरंगा लहराया, तो लंबे समय से भय में जी रहे लोगों के चेहरों पर राहत और अपनेपन का भाव स्पष्ट दिखाई दिया।
भय से स्वतंत्रता तक का सफर
ये दूरदराज के गांव कभी इस क्षेत्र के सबसे अधिक नक्सल प्रभावित इलाकों में गिने जाते थे। ये शीर्ष नक्सली नेतृत्व के छिपने और संचालन के केंद्र हुआ करते थे। इसी भय के माहौल के कारण यहां के निवासियों के लिए तिरंगा फहराना या कोई भी राष्ट्रीय त्योहार मनाना बेहद जोखिम भरा काम था।
अधिकारियों के अनुसार, 31 मार्च, 2026 को इस क्षेत्र को नक्सली प्रभाव से मुक्त घोषित किए जाने के बाद स्थिति में बड़ा बदलाव आया। इसके बाद यह पहला स्वतंत्रता दिवस था, जब ग्रामीणों को पूरे सम्मान और सामूहिक उल्लास के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अवसर मिला।
शांति और विकास की नई उम्मीद
इस अवसर पर ग्रामीणों ने ध्वज को सलामी दी और वर्षों के अलगाव के बाद राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल होने की अपनी इच्छा व्यक्त की। कई स्थानीय निवासियों के लिए यह दिन बेहद व्यक्तिगत था, जो इस बात की पुष्टि करता है कि क्षेत्र में शांति लौट आई है और अब विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों की जड़ें मजबूत हो सकती हैं। यह आयोजन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि अबूझमाड़ हिंसा के दौर से आगे बढ़कर स्थिरता और समावेश की ओर बढ़ रहा है।
इनपुट: IANS



