भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: तत्कालीन SDM और SDPO समेत 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी
बिहार के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में आरा की एक अदालत ने एक बड़ा कदम उठाया है। न्यायालय ने जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार और तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा सहित 11 पुलिस…
बिहार के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में आरा की एक अदालत ने एक बड़ा कदम उठाया है। न्यायालय ने जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार और तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा सहित 11 पुलिस अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, भोजपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) ने सभी आरोपियों को 12 अगस्त तक गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने का सख्त निर्देश दिया है।
यह पूरा मामला शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुई एक पुलिस मुठभेड़ से जुड़ा है, जिसमें काशीनाथ तिवारी के बेटे भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप था कि भरत भूषण ने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसे पांच गोलियां मारी गईं, जिससे बाद में अस्पताल में उसकी जान चली गई। इस घटना के बाद इलाके में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ था।
न्यायालय का कड़ा रुख
अदालत का यह आदेश शाहपुर थाना कांड संख्या 178/2026 में अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह द्वारा दायर एक याचिका के बाद आया है। उन्होंने जांच की प्रगति पर सवाल उठाते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 73 के तहत गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग की थी। अधिवक्ता के अनुसार, अदालत ने उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है।
जिन लोगों के खिलाफ वारंट जारी किया गया है, उनमें एसडीएम और एसडीपीओ के अलावा शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, दारोगा अंकित आर्यन, हरिचंद्र कुमार, एएसआई रामाशंकर यादव और एसटीएफ के विकास कुमार व अक्षय कुमार समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। हालांकि, भोजपुर पुलिस ने फिलहाल इस कार्रवाई की जानकारी होने से इनकार किया है।
जांच पर उठाए गए सवाल
याचिका में जांच से जुड़े कई अहम बिंदु उठाए गए थे। इसमें पूछा गया था कि जांच कब शुरू हुई, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए क्या कदम उठाए गए और जो गिरफ्तार नहीं हुए, उसका क्या कारण है। याचिका में मृतक भरत भूषण तिवारी के मोबाइल फोन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का पूरा ब्योरा भी मांगा गया था। दावा है कि तिवारी के मोबाइल में मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत थे।
अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने बताया कि अगर 12 अगस्त तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो पुलिस अधीक्षक (एसपी) को खुद अदालत में पेश होकर जवाब देना होगा। गौरतलब है कि इस मामले में एसटीएफ जवान अक्षय कुमार को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और राज्य सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक न्यायिक आयोग का भी गठन किया है।
इनपुट: IANS



