मुंगेर: बीमारी से निधन के बाद सैन्य सम्मान के साथ हवलदार संजीव को अंतिम विदाई, 5 साल के बेटे ने दी मुखाग्नि
बिहार के मुंगेर जिले के वासुदेवपुर गांव में उस समय माहौल बेहद गमगीन हो गया, जब सेना के एक हवलदार का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा। बीमारी के कारण इलाज के दौरान जान गंवाने वाले 41 वर्षीय हवलदार संजीव…
बिहार के मुंगेर जिले के वासुदेवपुर गांव में उस समय माहौल बेहद गमगीन हो गया, जब सेना के एक हवलदार का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा। बीमारी के कारण इलाज के दौरान जान गंवाने वाले 41 वर्षीय हवलदार संजीव कुमार का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान सबसे भावुक क्षण वह था जब उनके पांच वर्षीय बेटे योगेश राज ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी।
हवलदार संजीव कुमार आर्मी एयर डिफेंस रेजीमेंट में तैनात थे और उनकी वर्तमान पोस्टिंग ओडिशा के गोपालपुर में थी। कुछ दिन पहले तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें लखनऊ के कमान अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। सोमवार को सेना के जवान उनके पार्थिव शरीर को लेकर मुंगेर पहुंचे, जहां उनके अंतिम संस्कार में पूरा गांव उमड़ पड़ा।
सैन्य सम्मान और नम आंखें
श्मशान घाट पर सेना की परंपरा के अनुसार हवलदार संजीव को अंतिम विदाई दी गई। गया से आई सैन्य टुकड़ी के जवानों ने हवा में गोलियां दागकर उन्हें सलामी दी। इस मौके पर सूबेदार किशोर कुमार, नायक सुभाष कुमार निराला और सूबेदार दीपक चौधरी समेत कई सैन्यकर्मी मौजूद थे। जब तिरंगे में लिपटे ताबूत के पास मासूम योगेश खड़ा हुआ तो वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। लोगों ने 'शहीद संजीव कुमार अमर रहें' के नारे भी लगाए।
गांव में शोक की लहर
संजीव कुमार साल 2004 में सेना में भर्ती हुए थे और उन्होंने करीब 22 साल देश की सेवा की। उनके परिवार में पत्नी के अलावा दो छोटे बेटे हैं, जिनमें बड़ा बेटा योगेश पांच साल का और छोटा बेटा महज तीन साल का है। पति का पार्थिव शरीर देखकर उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था और वह बार-बार बेसुध हो जा रही थीं। सेना के जवान सुभाष कुमार ने संजीव को एक अनुशासित और कर्तव्यनिष्ठ सैनिक बताते हुए कहा कि देश ने एक बहादुर सपूत खो दिया है। गांव के लोगों ने सरकार से शहीद के परिवार को हरसंभव मदद देने की अपील की है।
इनपुट: IANS



