बांकीपुर उपचुनाव: भाजपा का गढ़ बचाने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पटना में डाला डेरा
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। पार्टी के इस सबसे मजबूत गढ़ को बचाने की जिम्मेदारी अब राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के…
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। पार्टी के इस सबसे मजबूत गढ़ को बचाने की जिम्मेदारी अब राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के कंधों पर आ गई है। इसी सिलसिले में वे दो दिवसीय दौरे पर शनिवार को पटना पहुंचे, जो उपचुनाव की घोषणा के बाद से उनका तीसरा दौरा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, नवीन के लगातार दौरे यह संकेत देते हैं कि पार्टी अपनी इस परंपरागत सीट को लेकर कितनी गंभीर है।
नितिन नवीन के पटना पहुंचने पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। अपने इस दौरे में वह पार्टी के विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा, हाल के छात्र आंदोलन और संगठन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, पार्टी उनके इस दौरे को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के 100 दिन पूरे होने के उपलक्ष्य में हो रहे कार्यक्रमों से भी जोड़ रही है।
क्यों अहम है बांकीपुर सीट?
बांकीपुर विधानसभा सीट दशकों से भाजपा का अभेद्य किला रही है। 1995 से लगातार इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है। पहले नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर यहां से विधायक थे, जिन्होंने 1995, 2000 और 2005 के दोनों विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की। उनके निधन के बाद 2006 के उपचुनाव से लेकर लगातार पांच बार नितिन नवीन यहां से विधायक चुने गए। उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई, जिस कारण यहां उपचुनाव कराना पड़ रहा है।
उपचुनाव की चुनौती
इस बार भाजपा ने बूथ स्तर के कार्यकर्ता नीरज सिन्हा को मैदान में उतारा है। हालांकि, पार्टी ने पहले अभिषेक बंटी को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन चारा घोटाले से जुड़े मामलों में उनके परिवार का नाम आने के बाद नामांकन दाखिल होने के बावजूद उम्मीदवार बदलना पड़ा। अब नीरज सिन्हा का मुकाबला जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की प्रत्याशी रेखा गुप्ता से है। विपक्ष नीरज सिन्हा को कमजोर उम्मीदवार बताकर फायदा उठाने की कोशिश में है, लेकिन भाजपा अपने मजबूत संगठन और नेतृत्व के दम पर जीत को लेकर आश्वस्त है।
पिछले चुनाव के आंकड़े
2025 के विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन ने इसी सीट पर 50,000 से अधिक मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी। उन्हें 98,299 वोट मिले थे, जबकि राजद की रेखा गुप्ता को 46,363 और जन सुराज की वंदना कुमारी को 7,717 वोट ही मिल पाए थे। अब 30 जुलाई को होने वाले मतदान और 3 अगस्त को आने वाले नतीजे ही तय करेंगे कि नितिन नवीन के बिना भाजपा अपना यह किला बचा पाती है या नहीं।
इनपुट: IANS



