मंगलवार, 15 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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रेलवे का नॉर्थ-ईस्ट मिशन: भूटान, नेपाल, बांग्लादेश से जुड़ेगा भारत, पूर्वोत्तर बनेगा अंतरराष्ट्रीय व्यापार का नया गेटवे

भारतीय रेलवे पूर्वोत्तर भारत की तस्वीर बदलने की एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है, जिसका लक्ष्य सिर्फ इस क्षेत्र के दूर-दराज के इलाकों को जोड़ना नहीं, बल्कि इसे पड़ोसी देशों के साथ व्यापार और पर्यटन का…

रेलवे का नॉर्थ-ईस्ट मिशन: भूटान, नेपाल, बांग्लादेश से जुड़ेगा भारत, पूर्वोत्तर बनेगा अंतरराष्ट्रीय व्यापार का नया गेटवे
(फोटो: IANS)

भारतीय रेलवे पूर्वोत्तर भारत की तस्वीर बदलने की एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है, जिसका लक्ष्य सिर्फ इस क्षेत्र के दूर-दराज के इलाकों को जोड़ना नहीं, बल्कि इसे पड़ोसी देशों के साथ व्यापार और पर्यटन का एक अहम केंद्र बनाना है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश को जोड़ने वाली कई महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाओं पर काम तेजी से चल रहा है, जिससे आने वाले सालों में यह इलाका भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय गलियारा बन सकता है।

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यह जानकारी सोमवार को मालीगांव स्थित पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के मुख्यालय में उत्तर प्रदेश के पत्रकारों के एक दल को दी गई। पत्र सूचना कार्यालय (PIबी), लखनऊ ने 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' कार्यक्रम के तहत यह दौरा आयोजित किया था।

पड़ोसी देशों तक पहुंच

भूटान: NFR के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी केके शर्मा ने बताया कि भूटान के साथ दो रेल लाइनों— बनारहाट-सामत्से और कोकराझार-गेलेफू— को हाल ही में मंजूरी मिली है। इनके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इन्हें 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

बांग्लादेश: बांग्लादेश के साथ अगरतला-अखौरा रेल प्रोजेक्ट का भौतिक निर्माण कार्य पूरा हो गया है। इसके अलावा, महिषासन जीरो प्वाइंट पर भी काम अंतिम चरण में है, जहां सिर्फ 170 मीटर का काम बाकी है।

नेपाल: नेपाल के लिए जोगबनी से विराटनगर तक कंटेनर ट्रेन पहले ही शुरू हो चुकी है और इस मार्ग को और आगे बढ़ाने पर काम चल रहा है।

पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने का मिशन

रेलवे का लक्ष्य 2029 तक पूर्वोत्तर के सभी राज्यों की राजधानियों को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ना है। पिछले एक दशक में इस क्षेत्र में करीब 2000 किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई जा चुकी हैं और लगभग पूरे नेटवर्क का विद्युतीकरण हो चुका है। कुछ प्रमुख परियोजनाएं इस प्रकार हैं:

  • मिजोरम: पिछले साल 13 सितंबर को बैराबी-सैरांग परियोजना के जरिए राजधानी आइजोल पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ी।
  • सिक्किम: सेवोक-रंगपो परियोजना के जरिए 2027 तक सिक्किम को रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।
  • मणिपुर: राजधानी इंफाल को 2028 तक रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
  • नागालैंड: 2029 तक नागालैंड को जोड़ने का लक्ष्य है। खास बात यह है कि 1903 में दीमापुर में पहला स्टेशन बनने के लगभग एक सदी बाद, 2022 में राज्य को शोखुवी के रूप में अपना दूसरा स्टेशन मिला।

वन्यजीव संरक्षण पर भी ध्यान

रेल नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ पर्यावरण की सुरक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। हाथियों को हादसों से बचाने के लिए लगभग 226 किलोमीटर लंबे एलीफेंट कॉरिडोर में AI-आधारित 'इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम' (IDS) लगाया जा रहा है। यह सिस्टम ट्रैक पर हाथियों के आते ही चेतावनी दे देता है। इसके अलावा, असम के हूलोंगापार वन्यजीव अभयारण्य में गिबन बंदरों के लिए रेलवे ट्रैक के ऊपर विशेष कैनोपी ब्रिज बनाए गए हैं ताकि वे सुरक्षित रूप से लाइन पार कर सकें।

बजट और भविष्य की योजनाएं

वर्तमान में, पूर्वोत्तर में करीब 73 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली लगभग 20 बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं। चालू वित्त वर्ष में इस क्षेत्र के लिए 11,488 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, 2007-10 के बीच मंजूर कई परियोजनाएं बजट की कमी से धीमी थीं, लेकिन 2015-16 के बाद इन्हें प्राथमिकता के आधार पर फंड मिलने से काम में तेजी आई है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल यात्री सुविधाएं बढ़ेंगी, बल्कि माल ढुलाई, व्यापार और सामरिक दृष्टि से भी भारत को मजबूती मिलेगी।

इनपुट: IANS

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